बॉम्बे हाई कोर्ट ने त्यौहार के दौरान सड़कों पर पटाखों और लेजर लाइटों पर लगाया प्रतिबंध
क्या है खबर?
महाराष्ट्र की बॉम्बे हाई कोर्ट ने पूरे प्रदेश में त्योहारों के जुलूसों के दौरान होने वाले भीषण शोर और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। उसने सड़क पर पटाखों के फोड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि लेजर लाइट, उच्च तीव्रता वाली ल्यूमेन लाइट और बीम पर भी रोक लगाई है। यह आदेश 22 सितंबर को न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और नीला गोखले की खंडपीठ ने जारी किया है।
आदेश
उत्सव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने या मृत्यु के लिए नहीं होते- कोर्ट
बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान, मौखिक रूप से कहा कि उत्सव लोगों की मृत्यु या स्वास्थ्य संबंधी कष्ट के लिए नहीं होते हैं।
कोर्ट ने यह आदेश गणेशोत्सव जैसे त्योहारों के दौरान अनियंत्रित प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर की गई जनहित याचिका पर पारित किया।
पीठ ने जोर दिया कि कार्रवाई सख्त होनी चाहिए न की स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने के बाद मामूली जुर्माने तक सीमित रहे।
आदेश
कोर्ट ने आयोजकों को दी बड़ी जिम्मेदारी
त्यौहार के दौरान सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और उत्सवों के दौरान लेजर लाइट, उच्च तीव्रता वाली ल्यूमेन लाइट और बीम का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
आयोजकों को आयोजन स्थलों और जुलूसों में दिखाई देने वाले डेसिबल मापन मीटर लगाने होंगे और हलफनामे में बताना होगा कि ध्वनि प्रणालियों में आंतरिक सीमा उपकरण मौजूद हैं।
आयोजकों को समूहों के लिए 1 लाख और व्यक्तियों के लिए 50,000 रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी।
जिम्मेदारी
उल्लंघन पर जब्त होगी राशि
कोर्ट ने निर्देश दिया कि ध्वनि स्तर के उल्लंघन की स्थिति में आयोजकों द्वारा जमा की गई राशि जब्त कर ली जाएगी।
अधिकारियों को नियमों का पालन न करने वाले ध्वनि तंत्रों और आपत्तिजनक उपकरणों को तुरंत जब्त करना होगा।
नियुक्त अधिकारियों को आयोजक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में डेसिबल स्तरों को सक्रिय रूप से मापना और रिकॉर्ड करना होगा।
अधिकारियों को एक से अधिक परमिट जारी करने से पहले किसी वार्ड में संचयी ध्वनि प्रभाव का मूल्यांकन करना होगा।