सड़क हादसों में मौतें घटीं, पर खतरे नहीं; शीर्ष पर उत्तर प्रदेश
इस साल भारत में सड़क हादसों से होने वाली मौतों में लगभग 3.2 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। जहाँ 2025 में 1,83,434 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई थी, वहीं इस साल यह संख्या घटकर करीब 1,77,500 तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि कुल हादसों की संख्या थोड़ी बढ़ सकती है, जो लगभग 5,20,200 तक पहुंचने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सड़क मौतें
इस साल सबसे ज्यादा सड़क हादसों में मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं, जहां 14,794 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसके बाद तमिलनाडु और महाराष्ट्र का नंबर आता है। देश में कुल सड़क मौतों का 35 प्रतिशत हिस्सा नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर दर्ज किया गया। तेज रफ्तार अभी भी हादसों की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है; अब तक 46,075 मामलों में इसे ही मुख्य कारण माना गया है।
पैदल चलने वालों की मौतें भी चिंताजनक रूप से काफी ज्यादा हैं। सरकार की नई PM-RAHAT योजना के तहत फरवरी से अब तक 12,000 से ज्यादा मामलों में कैशलेस (बिना पैसे दिए) इलाज मुहैया कराया गया है।