इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पति की मौत के बाद गोद लिया बच्चा भी होगा संपत्ति का वारिस
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोद लिए बच्चों के लिए एक अहम फैसला सुनाया है, जिससे उनकी कानूनी स्थिति अब और साफ हो गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई विधवा अपने पति की मौत के बाद किसी बच्चे को गोद लेती है, तो वह बच्चा पति की संपत्ति का कानूनी वारिस होगा। यह बड़ा फैसला प्रयागराज के एक जमीन विवाद के दौरान आया। यहां मोती रानी ने अपने पति के निधन के बाद रामजी नाम के एक बच्चे को गोद लिया था, लेकिन बाद में उसकी विरासत पर सवाल उठाए गए थे।
जस्टिस राय ने की रामजी की विरासत की पुष्टि
जस्टिस चंद्र कुमार राय ने 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के 'सावन राम बनाम कलावंती' और 'सुभाष मिसिर' मामलों के फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने साफ किया कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत किसी विधवा को बच्चा गोद लेने के लिए अपने दिवंगत पति की सहमति की जरूरत नहीं होती। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि रामजी को मुरलीधर और श्रीमती मोती रानी के गोद लिए बेटे के तौर पर उनकी संपत्ति में विरासत का पूरा अधिकार मिलेगा।