इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के रेस्तरां में लगाया हुक्का पर प्रतिबंध
क्या है खबर?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के रेस्तरां में हुक्का बार प्रतिबंधित कर दिया है। न्यायमूर्ति शेखर बी सरफ और न्यायमूर्ति अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि यह सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने यह फैसला विभिन्न रेस्तरां मालिकों द्वारा दायर 81 याचिकाओं के समूह पर सुनाया है, जिन्होंने हुक्का बार चलाने में पुलिस के हस्तक्षेप के खिलाफ गुहार लगाई थी।
फैसला
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा, "उत्तर प्रदेश के भीतर रेस्तरां द्वारा हुक्का बार चलाना और हुक्का सेवाएं प्रदान करना, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008 के नियम 4(3) का घोर उल्लंघन है। यह COTPA की योजना और उसके उद्देश्य के सीधे विपरीत है।"
कोर्ट ने प्रदेश सरकार से हुक्का पर प्रतिबंध लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया और सभी निर्धारित धूम्रपान क्षेत्रों में हुक्का परोसने पर कड़ी सजा का प्रावधान करने वाली अधिसूचना जारी करने को कहा।
अधिकार
निगम नहीं जारी कर सकते लाइसेंस
कोर्ट ने कहा कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निगमों के पास रेस्तरां में हुक्का पीने या हुक्का बार स्थापित करने के लिए लाइसेंस जारी करने या नियम बनाने का कोई अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पुलिस के पास COTPA अधिनियम के आदेशों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों की तलाशी लेने, जब्त करने, संपत्ति जब्त करने और जुर्माना लगाने की शक्ति है।
न्यायालय ने कहा कि हुक्का 'सेवा' निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों में भी अस्वीकार्य है।
आदेश
सिगरेट जितना ही खतरनाक है हुक्का
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर स्वच्छ हवा में सांस लेने का धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि यह मिथक है कि हुक्का सिगरेट से कम हानिकारक है, हुक्का सिगरेट जितना व्यसनकारी और हानिकारक है और इसमें सिगरेट के समान जहरीले रसायन हैं।
कोर्ट ने कहा कि हुक्का में तंबाकू पीने पर कोई प्रतिबंध नहीं, लेकिन फिर भी हुक्का पीने को प्रोत्साहित नहीं कर सकते।