दहेज मृत्यु मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम फैसला: दोषी बरी, जुर्माना लौटाने का भी आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को बरी किया है, जिसे पहले दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया था।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए बताया कि इस मामले में पुख्ता सबूतों की कमी है। कोर्ट ने इस बात का भी जिक्र किया कि महिला की मौत से 5 महीने पहले पति ने उससे बात करना बंद कर दिया था। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने 31 जुलाई को यह फैसला सुनाया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जुर्माना वापसी का आदेश दिया
महिला के परिवार का दावा था कि उसे 10 लाख रुपये के दहेज के लिए काफी प्रताड़ित किया गया था। यहां तक कि उसके पिता ने जमीन बेचकर 6 लाख रुपये भी दे दिए थे।
हालांकि, अदालत को इन दावों के पक्ष में कोई ठोस सबूत नहीं मिले, और न ही पति और उसकी मौत के बीच कोई सीधा संबंध दिखा।
अदालत ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय कानून के तहत दहेज लेना और देना दोनों ही गैरकानूनी है। पुराने फैसलों को रद्द करते हुए, अदालत ने अपीलकर्ता द्वारा जमा किए गए जुर्माने को वापस करने का आदेश दिया।