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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार, 11 को उम्रकैद
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखा है

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार, 11 को उम्रकैद

Jul 07, 2026
11:47 am

क्या है खबर?

गुजरात हाई कोर्ट ने साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय के अनुसार, 49 गुनहगारों में से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया है। कोर्ट ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

फैसला

हाई कोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया फैसला

यह फैसला हाई कोर्ट की 2 न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने सुनाया है। मामले की गंभीरता के कारण हाई कोर्ट ने विशेष पीठ का गठन किया था। मार्च 2025 से मामले की नियमित सुनवाई चल रही थी। राज्य सरकार की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि करने की याचिका और दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने पिछले महीने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया है।

पृष्ठभूमि

धमाकों में हुई थी 56 लोगों की मौत

गुजरात के अहमदाबाद में 26 जुलाई, 2008 को 70 मिनट के अंदर अलग-अलग जगहों पर कुल 22 बम विस्फोट हुए थे, वहीं 2 बम फट नहीं पाए थे। इन धमाकों में कुल 56 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जिन जगहों पर धमाके हुए, उनमें सरकारी सिविल अस्पताल, अहमदाबाद नगर निगम का एलजी अस्पताल, कई बसें, पार्क की गईं साइकिलें और कार शामिल थीं। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था।

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जांच

इंडियन मुजाहिदीन ने दिया था धमाकों को अंजाम

पुलिस की जांच में आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के 2002 गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इन धमाकों को अंजाम देने की बात सामने आई थी। सभी 35 FIR का विलय करने के बाद दिसंबर, 2009 में मामले में 78 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई। इनमें से एक आरोपी अयाज सैयद सरकारी गवाह बन गया और इससे आरोपियों की संख्या 77 रह गई। सैयद पर एक साइकल और बस में बम लगाने का आरोप था।

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फैसला

स्पेशल कोर्ट ने 18 फरवरी को सुनाई थी सजा

मामले में 8 फरवरी, 2022 को स्पेशल कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी माना था और 28 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। उसके बाद 12 फरवरी, 2022 को कोर्ट ने 49 दोषियों को हत्या, देशद्रोह और देश के खिलाफ युद्ध घोषित करने जैसी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) कानूनों तहत भी सजा सुनाई थी। इनमें से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा शामिल थी।

चुनौती

दोषियों ने फैसले को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती

स्पेशल कोर्ट के फैसले को दोषियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपी पक्ष ने पुलिस की जांच की प्रक्रिया, सबूतों और कबूलनामे को लेकर सवाल उठाए थे। इसी तरह राज्य सरकार ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने पुलिस की जांच की दोबारा से समीक्षा की, जिसमें लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से सही पाया गया। ऐसे में कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा है।

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