अध्ययन में खुलासा: दिल्ली-NCR के प्रदूषण में 25 प्रतिशत रसायनों का हाथ
दिल्ली-NCR में सर्दियों की धुंध के पीछे सिर्फ पराली जलाने को ही मुख्य कारण माना जाता रहा है, लेकिन एक सरकारी अध्ययन ने कुछ और ही बताया है। इस नए अध्ययन के मुताबिक, गाड़ियां, उद्योग और कचरा जलाना भी प्रदूषण के बड़े जिम्मेदार हैं। हैरानी की बात यह है कि इन स्रोतों से निकलने वाले केमिकल प्रदूषक सर्दियों के मौसम में शहर की PM2.5 में लगभग 25 प्रतिशत तक का योगदान देते हैं।
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी
परिवहन से होने वाला उत्सर्जन (ट्रांसपोर्ट एमिशन) भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है, जिसका हिस्सा 19 से 24 प्रतिशत तक होता है। वहीं, फसल की पराली और घरों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन को जलाने से भी 17 से 23 प्रतिशत तक प्रदूषण फैलता है। इसके अलावा, सड़कों पर उड़ने वाली धूल और फैक्ट्रियां भी इसमें अपनी भूमिका निभाती हैं।
राहत की बात यह है कि पंजाब और हरियाणा ने फसल के अवशेषों के निपटारे के तरीके बदलकर साल 2025 की खरीफ फसल के दौरान पराली जलाने के मामलों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-NCR में स्वच्छ हवा के लिए प्रदूषण के इन सभी स्रोतों पर एक साथ काम करना बेहद जरूरी है।