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ईरानी गायिका परस्तू अहमदी कौन हैं, जिन्हें बिना हिजाब गाना गाने पर मिली कोड़ों की सजा?
जानिए कौन हैं ईरान की मशहूर गायिका परस्तू अहमदी

ईरानी गायिका परस्तू अहमदी कौन हैं, जिन्हें बिना हिजाब गाना गाने पर मिली कोड़ों की सजा?

Jun 19, 2026
04:57 pm

क्या है खबर?

परस्तू अहमदी ईरान की एक लोकप्रिय पारंपरिक और लोक गायिका हैं। वो ईरान में महिलाओं की आजादी और संगीत पर लगी पाबंदियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में परस्तू पूरी दुनिया में तब चर्चा में आईं, जब ईरान की एक अदालत ने उन्हें बिना हिजाब के लाइव कॉन्सर्ट करने के जुर्म में 74 कोड़े मारने और 2 साल का बैन लगाने की बेहद क्रूर सजा सुनाई। आइए विस्तार से जानें कौन हैं परस्तू अहमदी।

सजा

परस्तू समेत पूरी टीम को 74 कोड़े मारने की सजा

यह मामला 2024 में परस्तू के यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम किए गए एक कॉन्सर्ट से जुड़ा है, जो आते ही वायरल हो गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिना हिजाब के परफॉर्म करने पर ईरानी प्रशासन ने परस्तू, उनके साथ मौजूद संगीतकारों और प्रोडक्शन टीम के अन्य आठ सदस्यों को 74-74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इस फैसले ने ईरान में कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।

प्रतिबंध

न गाना गा सकेंगे, न देश छोड़ पाएंगे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सख्त फैसला ईरान के 'कोम प्रांत' की एक आपराधिक अदालत ने सुनाया है। अदालत ने सिर्फ 74 कोड़े मारने की ही सजा नहीं दी, बल्कि परस्तू समेत पूरी टीम के सभी 9 लोगों पर अगले 2 साल के लिए देश छोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही, उन पर 2 साल तक किसी भी तरह के कलात्मक कार्य या म्यूजिक प्रोजेक्ट से जुड़ने पर भी रोक लगा दी गई है।

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पाबंदी

पाबंदियों के खिलाफ उठाई थी आवाज

कॉन्सर्ट के दौरान परस्तू बिना हिजाब के नजर आई थीं और उन्होंने ईरान का लोकप्रिय देशभक्ति गीत 'अज खूने जवानाने वतन' समेत कई प्रस्तुतियां दी थीं। ये कार्यक्रम किसी लाइव दर्शक के सामने नहीं, बल्कि एक सुनसान और खाली स्थान पर फिल्माया गया था। परस्तू ने इसे ईरान में महिला कलाकारों पर लगी सख्त पाबंदियों के खिलाफ एक सांकेतिक और कलात्मक विरोध के रूप में पेश किया था, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा मिली।

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परिचय

कौन हैं परस्तू अहमदी? मात्र 14 साल की उम्र से सीखा संगीत

परस्तू का जन्म 21 मार्च, 1997 को ईरान के नोशहर में हुआ था। उन्होंने फिल्म निर्देशन में ग्रेजुएशन की है और मात्र 14 साल की उम्र से ही पारंपरिक और लोक संगीत की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया था। परस्तू महिला कलाकारों पर लगी ईरानी प्रशासन की सख्त पाबंदियों को चुनौती देने के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं। वो हमेशा से अपने संगीत के जरिए सामाजिक बदलाव की आवाज उठाती रही हैं।

लोकप्रियता

'इमैजिनरी कॉन्सर्ट' से मिली थी वैश्विक पहचान

साल 2022 के 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन के दौरान परस्तू ने देशभक्ति गीत 'अज खूने जवानाने वतन' गाकर अपना समर्थन जताया था। इसके बाद उन्होंने 'द एयर ऑफ फ्रीडम' नामक गीत भी रिलीज किया। उन्हें वैश्विक पहचान दिसंबर 2024 में मिली, जब उन्होंने ईरान के एक ऐतिहासिक कारवांसराय में बिना दर्शकों के एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट किया। 'इमैजिनरी कॉन्सर्ट' नाम से प्रसारित इस प्रस्तुति ने महिला स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर दुनिया का ध्यान खींचा।

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