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13 साल बाद OTT पर रिलीज हुई राजकुमार राव की 'शाहिद', अपूर्वा असरानी ने उठाया सवाल
राजकुमार राव की पुरस्कार विजेता फिल्म का 13 साल बाद डिजिटल डेब्यू

13 साल बाद OTT पर रिलीज हुई राजकुमार राव की 'शाहिद', अपूर्वा असरानी ने उठाया सवाल

Sep 29, 2026
02:43 pm

क्या है खबर?

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली फिल्म 'शाहिद' आखिरकार 13 साल के लंबे इंतजार के बाद अब प्राइम वीडियो पर आ गई है। हंसल मेहता की निर्देशन में बनी यह एक बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म है। राजकुमार राव की इस फिल्म के लेखक-एडिटर अपूर्व एम असरानी ने एक लंबा पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने फिल्म की रिलीज के बाद के सफर पर बात की और फिल्म की OTT रिलीज में हुई देरी पर सवाल उठाए।

पोस्ट

शाहिद आजमी की कहानी पर आधारित है फिल्म की कहानी

अपूर्वा ने एक्स पर लिखा, 'राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली फिल्म 'शाहिद' आखिरकार प्राइम वीडियो पर आ गई है। हमारी फिल्म को स्ट्रीमिंग के लिए जगह मिलने में 13 साल लग गए। 'शाहिद' फिल्म शाहिद आजमी की कहानी है, जो एक वकील थे। उन्होंने टेरर कानूनों के तहत आरोपीयों का बचाव किया। ऐसे माहौल में जहां मुसलमानों को अक्सर बेगुनाह साबित होने से पहले ही दोषी मान लिया जाता था। इसी हिम्मत की वजह से उनकी हत्या कर दी गई।'

सवाल

अपूर्वा ने उठाए ये सवाल

अपूर्वा ने आगे सवाल किया, 'मैंने अक्सर सोचा है कि 'शाहिद' इतने लंबे समय तक किसी OTT प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं आई। यह 2014 से एक साल पहले रिलीज हुई थी। फिर एक ऐसा राजनीतिक माहौल बना, जिसमें असहमति रखने वाले, एक्टिविस्ट, पत्रकार और आरोपियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले लोग तेजी से शक के घेरे में आने लगे। उसी दौरान, उमर खालिद जैसे लोगों ने ट्रायल का इंतजार करते हुए जेल में कई साल बिताए।'

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बातचीत

अपूर्वा ने निर्देशकों की मुश्किलों पर की बात

अपूर्वा ने उन निर्देशकों की मुश्किलों पर भी बात की जो 'शाहिद' जैसी कहानियां कहना चाहते थे।

उन्होंने कहा, 'ऐसी कहानियों की ओर आकर्षित होने वाले कई निर्माता, अभिनेता और लेखक या तो उन्हें बनाने के लिए संघर्ष करते रहे या फिर "सिस्टम का हिस्सा बन गए" और ऐसी कहानियां कहने लगे, जिन्हें वो कभी नहीं कहना चाहते थे। ये कहानियां राजनीतिक रूप से सिस्टम के अनुकूल होने के कारण राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतती थी।'

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सवाल

अपूर्वा ने किया प्राइम वीडियो को धन्यवाद

अपूर्वा ने आगे कहा, 'शाहिद जैसी फिल्म को 2026 में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म क्यों मिला? क्या माहौल बदल गया है? क्या डर की राजनीति का विरोध बढ़ रहा है? वजह चाहे जो भी हो, मुझे इस फिल्म पर गर्व है। इसने मुझे एक सह-लेखक/एडिटर के तौर पर पहचान दिलाई और मुझे उस तरह के सिनेमा से दोबारा जोड़ा जिसमें मेरा यकीन है। अगर आपने इसे नहीं देखा है, तो जरूर देखें। अगर देख चुके हैं, तो दोबारा देखें। धन्यवाद प्राइम वीडियो।'

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