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संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त का छलका दर्द- मुझे सबकुछ थाली में सजाकर नहीं मिला
त्रिशाला दत्त का क्यों छलका दर्द?

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त का छलका दर्द- मुझे सबकुछ थाली में सजाकर नहीं मिला

May 22, 2026
03:11 pm

क्या है खबर?

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त ने एक पुराना राज खोला है। उन्होंने बताया कि जब उनकी मां रिचा शर्मा का अमेरिका में कैंसर का इलाज चल रहा था, तब उनके पिता संजय दत्त वहां क्यों नहीं रुक सके थे। त्रिशाला ने एक हालिया पॉडकास्ट में उस मुश्किल वक्त की पूरी सच्चाई बताई है। अपनी मां के कैंसर के इलाज के दिनों को याद कर क्या कुछ बोलीं त्रिशाला, आइए जानते हैं।

प्रताड़ना

भारतीय पहचान की वजह से अमेरिका में प्रताड़ित हुईं त्रिशाला दत्त

त्रिशाला इंसाइड थॉट्स आउट लाउड के पॉडकास्ट एपिसोड में शामिल हुईं, जहां उन्होंने संजय दत्त की बेटी के रूप में अपनी जिंदगी के बारे में बात की। त्रिशाला ने अमेरिका में बचपन के दौरान झेली गई प्रताड़ना पर बात की। उन्होंने खुलासा किया कि ये तब शुरू हुआ था, जब वो केवल 5 या 6 साल की थीं और इसकी मुख्य वजह उनकी भारतीय पहचान थी। उन्होंने बताया कि जब वो 10वीं में आईं तो चीजें बहुत ज्यादा बढ़ गईं।

दर्द

"मेरे पास सहारा लेने के लिए कोई नहीं था"

त्रिशाला बोलीं, "लोगों को पता चलने लगा था कि मैं कौन हूं और किस परिवार से ताल्लुक रखती हूं। उस समय मेरे पास सहारा लेने के लिए कोई नहीं था। काश तब मेरे पास बात करने के लिए कोई होता।" त्रिशाला ने 8 की उम्र में अपनी मां को खोने के दिनों को भी याद किया और बताया कि कैसे उस बेहद कठिन दौर में उनके पिता लगातार भारत और अमेरिका के बीच यात्रा करते रहते थे।

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दुखद

त्रिशाला दत्त ने याद किए मां के आखिरी दिन

त्रिशाला ने कहा, "मेरी मां का निधन ब्रेन ट्यूमर के कारण साल 1996 में हो गया था, तब मैं 8 साल की थी। साल 1989 में उनमें इस बीमारी का पता चला था। जब इसका पता चला, तब ये पहले ही स्टेज 4 पर था। इस तरह का ब्रेन कैंसर इंसानों में होने वाले सबसे घातक और आक्रामक कैंसरों में से एक है। पापा भारत और अमेरिका के बीच अपना समय बांट रहे थे।"

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कमूकू

त्रिशाला ने याद किए मां के आखिरी दिन

त्रिशाला बोलीं, पापा लगातार आ-जा रहे थे, क्योंकि वो काम कर रहे थे और उनके लिए भारत में एक एक्टर के तौर पर काम करने के साथ-साथ अमेरिका में मां के पूरे इलाज के दौरान रुकना बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा, "जब मां कैंसर से जूझ रही थीं, तब मुझे खाने में कुछ सुकून मिलता था, जिसके कारण मेरा वजन बढ़ गया। लोग सोचते हैं कि अगर कोई सेलिब्रिटी की बेटी है तो उसे एक खास तरीके से दिखना चाहिए।"

गलतफहमी

त्रिशाला ने स्टार किड होने की गलतफहमी पर तोड़ी चुप्पी

त्रिशाला ने बताया कि उनके बारे में लोगों की सबसे बड़ी गलतफहमी ये है कि वो मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुई हैं (यानी उन्हें सब कुछ आसानी से मिल गया)। उन्होंने कहा, "मैं कई तूफानों से होकर गुजरी हूं। क्या मैं मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुई थी? हां भी और ना भी। मुझे सबकुछ थाली में सजाकर नहीं मिला था। मैं जहां हूं, वहां पहुंचने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी है।"

परवरिश

मां को खोने के बाद अमेरिका में पली-बढ़ीं त्रिशाला 

बातचीत में त्रिशाला ने आगे कहा, "बाकी सभी लोगों की तरह मेरे भी अपने आंतरिक संघर्ष हैं। मैं परिपूर्ण नहीं हूं और मैं एक थेरेपिस्ट इसलिए बनी, ताकि लोगों को ये बता सकूं कि संघर्ष करना बिल्कुल सामान्य है। आपको हमेशा सब कुछ परफेक्ट रखने की जरूरत नहीं है और आप इस सफर में अकेले नहीं हैं।" त्रिशाला का जन्म 1988 में हुआ था। मां के जाने के बाद अमेरिका में उनके नाना-नानी ने उनकी परवरिश की।

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