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राजपाल यादव के घर पर बैंक का नोटिस, नीलामी से बचने के लिए सिर्फ 34 दिन
राजपाल यादव की बढ़ी मुश्किलें

राजपाल यादव के घर पर बैंक का नोटिस, नीलामी से बचने के लिए सिर्फ 34 दिन

Aug 06, 2026
01:33 pm

क्या है खबर?

अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बैंक का कर्ज न चुका पाने के कारण अब उनका पुश्तैनी घर नीलाम होने की कगार पर पहुंच गया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने शाहजहांपुर स्थित उनके घर पर 16.61 करोड़ रुपये की कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया है। बैंक ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर अगले 34 दिनों के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाई गई तो संपत्ति नीलाम कर दी जाएगी।

लोन

राजपाल ने पत्नी और मां के नाम पर लिया था 16.61 करोड़ का कर्ज

राजपाल ने सेंट्रल बैंक की मुंबई शाखा से अपनी पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी के नाम पर 16.61 करोड़ रुपये का लोन लिया था।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस के एक मामले में राजपाल को 3 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।

उनके बड़े भाई श्रीपाल यादव ने कहा, "लोन चुकाने को लेकर बैंक से बातचीत जारी है और जल्द ही इसका समाधान निकाल लिया जाएगा। फिलहाल संपत्ति की नीलामी जैसी कोई स्थिति नहीं है।"

नोटिस

बैंक मैनेजर बोले- 2 साल पहले भी लगा था नोटिस

सेंट्रल बैंक के मैनेजर अनुज वर्मा बोले, "शाहजहांपुर के पैतृक गांव कुंद्रा में स्थित इमारत पर नोटिस चस्पा किया गया है। बैंक ने 2 साल पहले भी इस मामले में नोटिस लगाया था। उस समय राजपाल और बैंक के बीच लोन चुकाने को लेकर एक सहमति बन गई थी।"

दिल्ली हाई कोर्ट 7 जुलाई को 7 चेक बाउंस मामलों में राजपाल को 3 महीने की सजा सुना चुका है, जिसमें उन्हें हर मामले के लिए 1.05 करोड़ रुपये देने हैं।

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विवाद की शुरुआत

फिल्म 'अता पता लापता' से शुरू हुआ विवाद

ये विवाद राजपाल की फिल्म 'अता पता लापता' से जुड़ा है।

2010 में फिल्म निर्माण के लिए उन्होंने 5 करोड़ का लोन लिया था। फिल्म फ्लॉप होने के कारण वे कर्ज नहीं चुका पाए, जिससे चेक बाउंस केस दर्ज हुआ। 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल और उनकी पत्नी को 6 महीने की सजा सुनाई, जिसे 2019 में सेशंस कोर्ट ने कायम रखा।

जून 2024 में हाई कोर्ट ने 9 करोड़ रुपये चुकाने की शर्त पर सजा पर रोक लगाई।

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आत्मसमर्पण

तिहाड़ जेल में सरेंडर और 12 दिन बाद जमानत

पैसे न चुका पाने के कारण कोर्ट ने राजपाल को 2 फरवरी 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया था।

इसके बाद 5 फरवरी को जब वे तिहाड़ जेल में सरेंडर करने पहुंचे तो उन्होंने दुखी होकर कहा, "सर, मैं क्या करूं? मेरे पास पैसे ही नहीं हैं और कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा। यहां मैं बिल्कुल अकेला हूं।"

जेल जाने के 12 दिन बाद 17 फरवरी, 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी।

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