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तगाराम भील को मिलेगा 'पद्मश्री', कभी चराते थे बकरियां; कैसे बने लोक साधना की मिसाल?
अलगोजा वादक तगाराम भील को मिलेगा 'पद्मश्री' का सम्मान

तगाराम भील को मिलेगा 'पद्मश्री', कभी चराते थे बकरियां; कैसे बने लोक साधना की मिसाल?

May 22, 2026
09:56 am

क्या है खबर?

थार की रेत से उठे अलगोजा के सुरों को वैश्विक पहचाने दिलाने वाले तगाराम भील 'पद्मश्री' से सम्मानित होंगे। 25 मई को राष्ट्रपति भवन में उन्हें इस सम्मान से नवाजा जाएगा, जिसका ऐलान जनवरी, 2025 में हुआ था। इसे देश की लोकसंस्कृति के लिए एक यादगार पल माना जा रहा है। राजस्थान के रहने वाले तगाराम उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने बिना दिखावा किए सिर्फ समपर्ण और साधना की बदौलत भारतीय लोक संगीत को विश्वस्तर पर पहचान दिलाई है।

परिचय

तगाराम भील कौन हैं?

तगाराम का जन्म राजस्थान के जैसलमेर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित मूलसागर गांव में हुआ था। बेहद साधारण और आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार में पलने-बढ़ने के कारण उन्होंने बचपन से काफी संघर्ष देखे। परिवार की गरीबी का सहारा बनने के लिए उन्होंने जंगल में बकरियां चलाना तक शुरू कर दिया। बड़े होने पर और परिवार का पेट पालने के लिए उन्होंने मजदूरी का काम भी किया। इस दाैरान वह पत्थर तोड़ा करते थे।

लगाव

बचपन में हो गया था अलगोजा से लगाव, चोरी-छिपे करते थे अभ्यास

तगाराम उस वक्त सिर्फ 7 साल के थे, जब उनका लगाव अपने पिता के वाद्य यंत्र अलगोजा से हो गया था। जब उनके पिता उन्हें बकरियां चराने के लिए भेजते थे, उस वक्त वह चोरी-छिपे अलगोजा को लेकर जंगल जाया करते थे और रेगिस्तान के सन्नाटे में बैठकर दिनभर इसे बजाने का अभ्यास किया करते थे। अपनी अटूट लगन और कड़ी मेहनत के दम पर वह 15 साल की उम्र में अलगोजा के उस्ताद बन गए।

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मंच

देश से विदेशी मंच तक पहुंचाया अलगोजा का सुर

साल 1981 में, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्हें पहली बार मंच पर अलगोजा बजाने का मौका मिला। कार्यक्रम का आयोजन जैसलमेर के 'मरु महोत्सव' में किया गया था। बस यही वो क्षण था जिसके बाद तगाराम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अमेरिका, जापान, अफ्रीका, फ्रांस और रुस समेत 25 से ज्यादा देशों में उन्होंने अपनी लोकसंस्कृति का परचम लहराया और भारत का विश्व स्तर पर प्रतिनिधित्व किया। अब उन्हें 'पद्मश्री' का सम्मान मिलेगा।

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ट्विटर पोस्ट

यहां देखिए तगाराम भील का वीडियो

आयोजन

25 मई की शाम को होगा कार्यक्रम का आयोजन

25 मई को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू साल 2026 के पद्मश्री पुरस्कारों को प्रदान करेंगी। कार्यक्रम के दौरान कुल 131 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस बार सरकार 'पीपुल्स पद्म' कॉन्सेप्ट पर जोर दे रही है। इसका मकसद छोटे इलाकों की प्रतिभाओं और गुमनाम नायकों तक पहुंचना है, जो निस्वार्थ भाव से समाज और कला के क्षेत्र में अपना याेगदान दे रहे हैं। #PeoplesPadma के तहत कोई भी नामांकन भर सकता है।

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