ममूटी को मिलेगा 'पद्म भूषण' सम्मान, जानिए साधारण परिवार से आकर कैसे बने सिनेमा के सुपरस्टार
क्या है खबर?
मलयालम सिनेमा के चमकते सितारों में से एक अभिनेता ममूटी को 25 मई को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक 'पद्म भूषण' से नवाजा जाएगा। एक साधारण परिवार में जन्म लेने से लेकर वकालत की पढ़ाई पूरी करने और फिर कोर्ट रूम छोड़कर सिनेमा की दुनिया में महानता का नया इतिहास रचने तक ममूटी ने हर किरदार को शिद्दत से जिया है। आइए इस मौके पर जानते हैं मोहम्मद कुट्टी का 'मेगास्टार ममूटी' बनने तक का पूरा सफर।
सफरनामा
50 साल का सफर और 400 से ज्यादा फिल्में
सिनेमाई पर्दे पर ममूटी के नाम से मशहूर मोहम्मद कुट्टी इस्माइल पनिपरम्बिल का जन्म केरलम के अलाप्पुझा जिले के चंडीरूर गांव में एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था। 7 सितंबर, 1951 को जन्मे ममूटी भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे सम्मानित अभिनेताओं में से एक हैं। मनोरंजन की दुनिया में 50 से अधिक वर्षों का शानदार सफर तय कर चुके 74 वर्षीय ममूटी अब तक 400 से ज्यादा फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं।
वकालत
कोर्ट रूम छोड़ जब सिनेमा की दुनिया में आए ममूटी
ममूटी ने एर्नाकुलम के सरकारी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की और फिर 2 साल तक एक वकील के रूप में काम भी किया, लेकिन अभिनय के प्रति उनका जुनून उन्हें ज्यादा दिन तक कोर्ट रूम में बांधकर नहीं रख सका और वो फिल्मी दुनिया में चले आए। उनका ये फैसला आगे चलकर मलयालम सिनेमा के इतिहास को हमेशा के लिए बदलने वाला साबित हुआ। ममूटी ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत फिल्म 'अनुभवनगल पालिचकल' से की थी।
मेहनत
कड़े संघर्ष के बाद मिला सुपरस्टार का तमगा
हालांकि, पहली फिल्म से ममूटी को कोई खास पहचान नहीं मिली। उन्होंने सालों तक कड़ा संघर्ष किया और 1970 के दशक के आखिरी सालों में जाकर वो इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना पाए। 1980 के दशक के मध्य तक ममूटी एक बड़े सुपरस्टार बन चुके थे। 'इंस्पेक्टर बलराम' जैसी एक्शन-ड्रामा से भरपूर भूमिकाओं के जरिए उन्होंने साबित कर दिया कि वो एक ऐसे अभिनेता हैं, जो आम दर्शकों की पसंद और कलात्मक गहराई के बीच बेहतरीन संतुलन बनाना जानते हैं।
सम्मान
'पद्मश्री' के बाद अब 'पद्म भूषण' सम्मान
ममूटी ने अभिनय के लिए 3 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने रिकॉर्ड 7 बार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार जीता है, जो मलयालम सिनेमा पर उनके जबरदस्त दबदबे को साबित करता है। भारतीय संस्कृति और सिनेमा में उनके अद्वितीय व स्थायी योगदान के लिए ममूटी को देश के बड़े नागरिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें साल 1998 में 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया था और अब साल 2026 में उन्हें 'पद्म भूषण' पुरस्कार से विभूषित किया जाएगा।
जानकारी
खुशहाल शादीशुदा सफर और पैन-इंडिया स्टार बेटा
ममूटी साल 1979 से सुल्फत के साथ एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिता रहे हैं। उनके 2 बच्चे हैं सुरुमी और दुलकर सलमान (जो खुद एक मशहूर पैन-इंडिया स्टार हैं)। अभिनय के अलावा ममूटी फिल्में भी बनाते हैं और सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रहते हैं।
आयोजन
25 मई की शाम को दिए जाएंगे पद्म पुरस्कार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 मई को राष्ट्रपति भवन में साल 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस बार सरकार 'पीपुल्स पद्म' कॉन्सेप्ट पर ज्यादा जोर दे रही है, जिसका मकसद पद्म पुरस्कारों को मशहूर लोगों के दायरे से बाहर निकालकर देश के सुदूर इलाकों में काम करने वाले गुमनाम नायकों और सच्ची प्रतिभाओं तक पहुंचाना है, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज और कला की सेवा की है। कुल मिलाकर अब ये देश की आम जनता का पुरस्कार बन चुका है।