लीजा रे की जिंदगी का सबसे बड़ा झटका, जब डॉक्टर बोला- सिर्फ 5 साल बचे हैं
क्या है खबर?
मशहूर अभिनेत्री और मॉडल लीजा रे ने हाल ही में अपनी जिंदगी के उस सबसे काले दौर को याद किया है, जिसने उनकी पूरी दुनिया हिलाकर रख दी थी। साल 2009 में 'मल्टीपल मायलोमा' (एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर) से पीड़ित होने के बाद लीजा को डॉक्टर से जो सुनना पड़ा, वो किसी बुरे सपने जैसा था। आइए जानते हैं डॉक्टर ने ऐसा क्या कहा था, जिसे सुन लीजा सन्न रह गई थीं।
चेतावनी
मौत की चेतावनी से सन्न रह गई थीं लीजा
लीजा ने साल 2009 के उस दौर को याद किया, जब उन्हें 'मल्टीपल मायलोमा' का पता चला था। उन्होंने बताया कि जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो डॉक्टर ने उन्हें बहुत ही सीधे शब्दों में एक कड़वा सच बताया था। डॉक्टर ने उनसे कहा था, "तुम्हारे पास जीने के लिए सिर्फ 5 साल बचे हैं।" लीजा के लिए वो पल किसी बेहद खौफनाक सपने जैसा था, जिसने उनकी पूरी दुनिया को एक झटके में हिलाकर रख दिया था।
हौसला
मौत के आंकड़ों का डर और जीने की जिद
मिस इंडिया अदिति गोवित्रिकर से बातचीत में लीजा बोलीं कि उस समय चिकित्सा जगत के आंकड़ों ने उन्हें बुरी तरह डरा दिया था। उन्होंने कहा, "जब आप ऐसे आंकड़े देखते हैं तो ऐसा लगता है जैसे आपको सीधे मौत का फरमान सुना दिया गया हो।" हालांकि, उस गहरे डर के बीच भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने इन आंकड़ों को खुद पर हावी नहीं होने दिया और इस बीमारी के खिलाफ मानसिक और शारीरिक रूप से लड़ने का फैसला किया।
दर्द
दूसरी बार कैंसर लौटने पर और गहरा था दर्द
इलाज और स्टेम सेल थेरेपी के बाद लीजा की हालत में सुधार हुआ, लेकिन उनकी चुनौतियां खत्म नहीं हुईं। कुछ समय बाद कैंसर फिर लौट आया। लीजा ने बताया कि बीमारी की ये खबर उनके लिए पहली बार से भी बड़ा झटका थी, क्योंकि दूसरी बार वो इसके दर्द, कठिन इलाज और नतीजों से पूरी तरह परिचित थीं। इसी वजह से कैंसर की वापसी ने उन्हें मानसिक रूप से गहराई तक प्रभावित किया और भीतर तक झकझोर दिया।
मानसिक स्थिति
अंदर की टूटन और बाहर की मजबूती के बीच जूझती रहीं लीजा
लीजा ने उन दिनों को याद बताया कि बीमारी के दौरान और उसके बाद एक समय ऐसा था, जब वो अपनी असली जिंदगी नहीं जी रही थीं। भीतर से टूट चुकीं लीजा दुनिया के सामने खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करती थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि कैंसर से शारीरिक रूप से उबरना जितना कठिन था, उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानसिक और भावनात्मक रूप से इस सदमे से बाहर निकलना था। यही उनकी रिकवरी का सबसे मुश्किल दौर रहा।
इलाज
इलाज और पूरी तरह उबरने का सफर
लीजा के मुताबिक, उन्होंने इस बीमारी को हराने के लिए केवल पारंपरिक चिकित्सा और कीमोथेरेपी का सहारा नहीं लिया, बल्कि उन्होंने अपने जीने के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने ध्यान, अध्यात्म, सही खान-पान और मानसिक शांति को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। उनका मानना है कि कैंसर से पूरी तरह उबरने में उनकी आंतरिक इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई, जिसके दम पर वो आज न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि स्वस्थ जीवन जी रही हैं।