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'मस्त महिला मंडली': कामकाजी महिलाओं की दोस्ती, इच्छा और संघर्ष दिखाती है ये डॉक्यूमेंट्री
'मस्त महिला मंडली' के बारे में जानिए

'मस्त महिला मंडली': कामकाजी महिलाओं की दोस्ती, इच्छा और संघर्ष दिखाती है ये डॉक्यूमेंट्री

Jun 16, 2026
08:31 am

क्या है खबर?

'मस्त महिला मंडली' नाम की एक डॉक्यूमेंट्री इन दिनों काफी चर्चा बटोर रही है। यह कहानी मुंबई के श्रमिक वर्ग महिलाओं की जिंदगी, उनके खुशी के पलों, ख्वाहिशों और संघर्ष को बिना किसी दिखावट के गहराई से दर्शाती है। इस डॉक्यूमेंट्री की सबसे खास बात यह है कि शहर की 11 कामकाजी महिलाओं ने मिलकर डॉक्यूमेंट्री को अपने स्मार्टफोन से शूट और सह-निर्देशित किया है। इसका प्रीमियर मुंबई के रीगल सिनेमा में 28 अप्रैल को हुआ था।

निर्माण

डॉ शिल्पी गुलाटी ने डॉक्यूमेंट्री का संपादन किया

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता और TISS मुंबई की सहायक प्रोफेसर डॉ शिल्पी गुलाटी ने 'मस्त महिला मंडली' का सह-निर्देशन और संपादन किया है। उनके साथ अंजुम शेख, नाज़नीन सिद्दीकी, दर्शना मयेकर, रेहाना शेख, गौरी राणे, रोहिणी कदम, कविता घुगे, शीतल नवले, कविता खोमने और वैशाली माने भी शामिल रहीं। सभी ने मिलकर 18 महीनों तक इस परियोजना पर काम किया है। 72 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री में महिलाएं अपनी खुद की रोजमर्रा जिंदगी को कैमरे में कैद करती हैं।

कॉपीराइट

11 निर्देशकों के बीच साझा हुआ कॉपीराइट

'मस्त महिला मंडली' की कहानी झुग्गी-झोपड़ियों और श्रमिक वर्ग की महिलाओं पर आधारित है। यह डॉक्यूमेंट्री न सिर्फ उनके संघर्ष काे दिखाती है, बल्कि उनकी मस्ती, हंसी-मजाक, गहरी दोस्ती, और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की जिद काे भी दिखाती है। फिल्म के निर्माण में CORO इंडिया, TISS के मीडिया स्कूल और अमेरिकन जूइश वर्ल्ड सर्विस ने अपना सहयोग दिया है। वहीं परियोजना का कॉपीराइट सभी 11 निर्देशकों के बीच समान रूप से साझा किया गया है।

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विचार

कहां से आया था डाॅक्यूमेंट्री बनाने का विचार?

फेमिनिज्म इन इंडिया से बातचीत में, डॉ गुलाटी ने कहा, "मैंने फिल्म निर्माण कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव रखा क्योंकि मुझे लगा कि अगर महिलाएं सचमुच फिल्म का सह-निर्देशन करना चाहती हैं, तो उन्हें पहले इस माध्यम में प्रशिक्षित होना आवश्यक है। फिर हमने उन महिलाओं की पहचान करना शुरू किया जो इस प्रक्रिया में भाग लेंगी।" उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान, महिलाएं एक-दूसरे संग खाना पकाते, खाते समय या रोजमर्रा के काम करते हुए डॉक्यूमेंट्री शूट करती थीं।

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