करण जौहर की वो फिल्में, जिन्होंने बॉलीवुड को सिखाई प्यार-दोस्ती और रिश्तों की नई परिभाषा
क्या है खबर?
भारतीय सिनेमा में करण जौहर का नाम सबसे मशहूर फिल्म निर्माताओं में शामिल हैं। खासतौर पर बॉलीवुड में जब-जब प्यार और दोस्ती की बात होती है, तो सबसे पहले करण की यादगार फिल्मों का नाम जहन में आता है। सिर्फ प्यार और दोस्ती ही नहीं, फिल्म निर्माता ने पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की उलझनों को भी अपनी फिल्मों के जरिए दर्शकों के सामने बखूबी पेश किया है। यहां देखिए 54 साल के हो चुके करण की कुछ यादगार फिल्में।
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'कुछ कुछ होता है' और 'कभी खुशी कभी गम'
करण ने अपने निर्देशन की शुरुआत 'कुछ कुछ होता है' (1998) से की थी। इसके जरिए ही उन्होंने पहली बार बॉलीवुड को "प्यार दोस्ती है" का पाठ पढ़ाया था। फिल्म भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसमें शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी मुख्य किरदार में थे। 2001 में आई फिल्म 'कभी खुशी कभी गम' से उन्होंने दर्शकों के सामने पारिवारिक मूल्यों की भव्यता को पेश किया। तभी को आज भी इस फिल्म को एक सांस्कृतिक और पारिवारिक क्लासिक माना जाता है।
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'कभी अलविदा ना कहना' और 'कल हो ना हो'
करण की अगली सुपरहिट फिल्म 'कल हो ना हो' थी जिसमें फिर से शाहरुख नजर आए। उनके साथ रानी, प्रीति जिंटा और अभिषेक बच्चन भी थे। इसके जरिए करण ने बॉलीवुड में रिश्तों की कड़वी सच्चाई दिखाई और शादीशुदा रिश्ते में घुटन, जटिलता और भावनाओं को गहराई से पर्दे पर दर्शाया। दूसरी ओर, 'कल हो ना हो' (2003) से उन्होंने दर्शकों को सिखाया कि जिंदगी छोटी हो या बड़ी, उसे पूरी तरह और अपनों के साथ मुस्कुराते हुए जीना चाहिए।
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'माई नेम इज़ खान' और 'ऐ दिल है मुश्किल'
करण की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में 'माई नेम इज़ खान' भी शामिल हैं, जो 2010 में रिलीज हुई थी। हमेशा प्यार, दर्द और रिश्तों पर आधारित फिल्में बनाने वाले फिल्म निर्माता ने इसके जरिए गंभीर और संवेदनात्मक मुद्दा उठाया। साथ ही समाज को पहचान, धर्म और मानवता का संदेश दिया। रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा और ऐश्वर्या राय के साथ क्लासिक फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' देकर उन्होंने दर्शकों का दिल फिर जीत लिया। एकतरफा प्यार की ताकत लोगों को बखूबी समझाई।