वायलिन वादिका डॉ एन राजम का जादुई सफर जानिए, अब मिलेगा 'पद्म विभूषण'
क्या है खबर?
दुनियाभर में मशहूर वायलिन वादिका डॉ एन राजम को कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2026 के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक 'पद्म विभूषण' से नवाजा जाएगा। उन्हें ये सम्मान उत्तर प्रदेश के काशी का गौरव बढ़ाने के लिए दिया जा रहा है। डॉ राजम वो महान शख्सियत हैं, जिन्होंने वायलिन जैसे वाद्य यंत्र को भारत में एक नई पहचान दी। आइए जानें संगीत की इस महागुरु के बारे में।
जन्म और प्रशिक्षण
चेन्नई में जन्म और पिता से मिली पहली ट्रेनिंग
राजम का जन्म साल 1938 में चेन्नई के एक संगीतप्रेमी परिवार में हुआ था। उनके पिता विद्वान ए नारायण अय्यर कर्नाटक संगीत के एक जाने-माने और बड़े जानकार थे। उनके भाई टी एन कृष्णन भी कर्नाटक शैली के एक बेहद प्रसिद्ध और दिग्गज वायलिन वादक रहे हैं। राजम ने कर्नाटक संगीत की अपनी शुरुआती ट्रेनिंग अपने पिता की देखरेख में ही शुरू की थी और आगे चलकर दिग्गज गायक पंडित ओंकारनाथ ठाकुर से रागों को विकसित करने के गुर सीखे।
शुरुआत
...जब मंच पर पहली बार उतरीं राजम
डॉ राजम ने बचपन में ही एक 'अद्भुत प्रतिभा' के रूप में अपने संगीत के सफर की शुरुआत कर दी थी। एक सोलो वायलिन वादक के रूप में पिछले 50 से अधिक सालों के अपने सफर में उन्होंने संगीत की दुनिया में एक जबरदस्त मुकाम हासिल किया है। महज 15 की उम्र में जब उन्होंने पहली बार हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के मंच पर वायलिन बजाना शुरू किया तो वायलिन के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आ गई।
शैली
पिता के मार्गदर्शन में खोजी 'गायकी अंग' तकनीक, देश-विदेश में बिखेरा जलवा
छोटी सी उम्र में राजम ने वो कर दिखाया, जिसे उस दौर के दिग्गज संगीतकार भी नामुमकिन मानते थे। अपने पिता के कुशल मार्गदर्शन में ही राजम ने वायलिन पर 'गायकी अंग' (इंसानी आवाज की तरह वायलिन बजाने की शैली) को पूरी तरह विकसित किया। अपनी इस जादुई कला के दम पर राजम ने न केवल पूरे भारत में, बल्कि दुनियाभर के कोने-कोने में अपनी शानदार प्रस्तुतियां दी हैं और वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।
सेवा
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से रहा 40 साल का अटूट नाता
राजम ने शिक्षा के क्षेत्र में भी लगातार संगीत की सेवा की। वो लगभग 40 वर्षों तक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के संगीत एवं मंच कला संकाय में संगीत की प्रोफेसर रहीं। अपनी काबिलियत के दम पर उन्होंने BHU में संगीत विभाग के अध्यक्ष और कॉलेज की डीन के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। उन्होंने अपनी बेटी डॉ संगीता शंकर, पोतियों रागिनी और नंदिनी शंकर और अपनी भतीजी कला रामनाथ को वायलिन की दुनिया का बड़ा नाम बनाया।
जानकारी
मायके के बाद ससुराल में भी मिला सुरों का साथ
राजम की शादी LIC के पूर्व उच्च अधिकारी टीएस सुब्रमण्यन से हुई है। उनका ससुराल भी कला और समाज सेवा से गहराई से जुड़ा रहा है। उनकी सास श्रीमती पद्मा स्वामीनाथन एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता और कर्नाटक संगीत की बेहतरीन गायिका थीं।
सम्मान
अब देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से होंगी सम्मानित
राजम को कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पहले ही प्रतिष्ठित 'पद्मश्री' और 'पद्म भूषण' से नवाजा जा चुका है। संगीत साधना के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अब उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया जाएगा। 3 शीर्ष पद्म पुरस्कारों से सम्मानित होकर राजम ने न केवल संगीत जगत का, बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है।
समारोह
इस बार क्यों खास होगा पद्म पुरस्कार समारोह?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आगामी 25 मई को राष्ट्रपति भवन में साल 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस बार का पद्म सम्मान समारोह बेहद खास होने जा रहा है, क्योंकि सरकार खासतौर से 'पीपुल्स पद्म' की भावना पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है। सरकार का पूरा ध्यान देश के सुदूर और ग्रामीण इलाकों में छिपी 'गुमनाम नायकों' और प्रतिभाओं को सम्मान देना है, जिन्होंने बिना प्रचार या स्वार्थ के समाज, देश और कला की निस्वार्थ सेवा की है।