दीया मिर्जा बोलीं- जनहित अभियान के लिए कभी पैसा नहीं लिया, 10 साल से जुटी हूं
क्या है खबर?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के पटाखों से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में बॉलीवुड सितारों को बिना फीस शामिल होने की सलाह दी है। इस बीच अभिनेत्री दीया मिर्जा ने कहा है कि उन्होंने कभी किसी जनहित अभियान के लिए पैसे नहीं लिए। उन्होंने प्रदूषण के खिलाफ एक दशक से ज्यादा समय से काम करने की बात कही और बताया कि इस मुद्दे पर बोलने पर उन्हें अक्सर आलोचना का सामना करना पड़ता है।
खुलासा
जनहित अभियान के लिए कभी पैसे नहीं लिए- दीया
हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में दीया ने बताया, "मैंने किसी भी जनहित अभियान के लिए कभी पैसे नहीं लिए हैं। मुझे नहीं पता कि किसे मोटी रकम दी गई है। मुद्दा ये है कि अगर प्रदूषण जैसी आसानी से सुलझने वाली समस्या को हल करना प्राथमिकता हो तो हस्तियां नागरिक समाज और सरकारों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। जब भी हम पटाखों के इस्तेमाल के खिलाफ बोलते हैं, हम पर हमले होते हैं।"
जंग
10 साल से प्रदूषण के खिलाफ लड़ रहीं दीया
अभिनेत्री बोलीं, "मैं एक दशक से भी ज्यादा समय से हवा की गुणवत्ता की ओर ध्यान खींचने पर ध्यान केंद्रित कर रही हूं। प्रदूषण और इसके समाधानों की तरफ ध्यान आकर्षित करने का ये निरंतर प्रयास है। अगर आप मेरा इंस्टाग्राम स्टेटस चेक करेंगे तो आपको एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर रोजाना अपडेट मिलेगा। UNEP ने वायु प्रदूषण से निपटने के प्रयासों को जुटाने और समर्थन देने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं, और मैं भी इसका हिस्सा रही हूं।"
पलटवार
हाई कोर्ट की फटकार पर दीया मिर्जा का पलटवार
पटाखे विरोधी अभियान में फिल्मी सितारों को भारी फीस देने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है।
कोर्ट ने कहा कि जनहित के कामों के लिए जनता का पैसा बर्बाद न किया जाए और सितारों को बिना फीस समाज के लिए आगे आना चाहिए।
इस पर दीया ने पलटवार करते हुए साफ कहा कि सितारे मुफ्त में काम करने को तैयार हैं, लेकिन असली समस्या सरकारी विभागों में आपसी तालमेल की कमी है।
सख्त रुख
प्रदूषण पर बॉम्बे हाई कोर्ट की सितारों को खरी-खरी
मुंबई में बढ़ते प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की।
जज गिरीश कुलकर्णी ने महाराष्ट्र सरकार को नसीहत दी कि जनहित अभियान के लिए सितारों पर जनता का पैसा न लुटाया जाए।
कोर्ट ने कहा कि अगर सितारे फीस मांगते हैं तो उनके पास जाने की जरूरत ही नहीं। जिस शहर ने उन्हें सबकुछ दिया, उसके लिए उन्हें मुफ्त में आगे आना चाहिए। कोर्ट ने मराठी कलाकारों से संपर्क करने का सुझाव दिया।