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'द वन' से पहले इन फिल्मों में दिखा भारतीय लोककथाओं और मान्यताओं का असली डर
भारतीय लोककथाओं को दिखाती हैं ये फिल्में

'द वन' से पहले इन फिल्मों में दिखा भारतीय लोककथाओं और मान्यताओं का असली डर

Sep 16, 2026
07:28 pm

क्या है खबर?

सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म 'द वन- फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' काफी चर्चा में है। एकता कपूर द्वारा निर्मित यह एक अलौकिक व पौराणिक सस्पेंस-थ्रिलर है, जिसमें भारतीय लोककथाओं और प्राचीन मान्यताओं को दर्शाया गया है। फिल्म बिहार के पटना स्थित 16वीं सदी के 400 साल पुरानी वन देवी मंदिर के रहस्यों को उजागर करती है। इससे पहले भी भारतीय सिनेमा में ऐसी फिल्में आई हैं, जिनमें लोककथाओं और रहस्यों काे दिखाया गया है। यहां डालिए एक नजर।

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'तुम्बाड' और 'मुंज्या'

2018 में आई 'तुम्बाड' को लोककथाओं का मास्टरपीस माना जाता है। इसकी कहानी महाराष्ट्र की एक प्राचीन लोककथा और देवी के पहले पुत्र 'हस्तर' के काल्पनिक मिथक पर आधरित है।

लालच और श्राप की यह कहानी एक अलग दुनिया दिखाती है।

शरवरी और अभय वर्मा अभिनीत फिल्म 'मुंज्या' महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र की प्रसिद्ध लोक मान्यता पर आधारित है। इसके मुताबिक, अगर किसी लड़के की जनेऊ या शादी से पहले मौत हो जाए, तो वह डरावना भूत बन जाता है।

#3 & #4

'भेड़िया' और 'बुलबुल'

वरुण धवन की फिल्म 'भेड़िया' (2022) अरुणाचल प्रदेश के घने जंगलों और वहां की लोककथाओं में प्रचलित 'विशालकाय भेड़िये' की कहानी पर आधारित है, जिसका काम प्रकृति की रक्षा करना है।

फिल्म दिखाती है कि कैसे एक आम इंसान जंगल की रहस्यमयी शक्तियों के चलते इच्छाधारी भेड़िया बन जाता है।

2020 में आई तृप्ति डिमरी की फिल्म 19वीं सदी के बंगाल के बैकड्रॉप पर आधारित है। यह 'उल्टे पैर वाली चुड़ैल' की लोककथा को एक सामाजिक नजरिए से दिखाती है।

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#5 & #6

'कांतारा फ्रेंचाइजी' और 'स्त्री'

ऋषभ शेट्‌टी की 'कांतारा फ्रेंचाइजी' कर्नाटक के तटीय इलाके की स्थानीय लोक परंपरा 'दैव कोला' और इंसान व जंगलों के बीच के सदियों पुराने टकराव पर आधारित है।

फिल्म में 'गुलिगा दैव' और 'पंजुरली दैव' से जुड़ी गहरी मान्यताओं को दर्शाया गया है।

श्रद्धा कपूर की 'स्त्री फ्रेंचाइजी' कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में फैली असल शहरी लोककथा "नाले बा" (कल आना) पर आधारित है। यहां लोग "नाले बा" को घर के बाहर लिखते थे, ताकि चुड़ैल घर न आ सके।

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