
समोसे बेचने वाले ने पास की CA फाइनल की परीक्षा, जानें कैसे की तैयारी
क्या है खबर?
हाल ही में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने CA फाइनल का रिजल्ट जारी किया था।
CA फाइनल का रिजल्ट जारी होने के बाद ओडिशा के एक समोसे बेचने वाले की जिंदगी ही बदल गई।
जी हां, फुटपाथ पर समोसे बेचने वाले शशिकांत शर्मा ने CA फाइनल की परीक्षा पास कर अपने सपनों को एक नई उडान दी है।
आइए जानें शशिकांत शर्मा ने CA फाइनल परीक्षा की तैयारी कैसे की और कहां से मिली उन्हें प्रेरणा।
जीवन
समोसे बेचकर करते हैं गुजारा
शशिकांत शर्मा पश्चिमी ओडिशा के झारसुगुड़ा शहर में झंडा चौक के पास एक ठेले पर तले हुए स्नैक्स जैसे समोसे आदि बेचा करते हैं।
27 वर्षीय शशिकांत शर्मा के पास कोई नौकरी और कमाई के अन्य कोई संसाधन नहीं थे। वे अपने बड़े भाई मनोज को ठेला लगाकर स्नैक्स बेचने में मदद करते थे। इससे ही उनकी आमदनी होती थी।
लेकिन 13 अगस्त, 2019 को CA फाइनल परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद उनका जीवन ही बदल गया।
परिवार
पिता प्रतिदिन कमाते हैं मात्र 200 रुपये
शशिकांत के पिता एक मंदिर के पुजारी हैं और वे लोगों के घरों में पूजा और अन्य अनुष्ठानों का आयोजन करके प्रतिदिन लगभग 200 रुपये कमाते हैं।
अपने पिता की आय को बढ़ाने के लिए है शशिकांत और उनके भाई मनोज ने स्नैक्स बेचना शुरू किया।
कठिन समय के बावजूद शशिकांत ने 2009 में अपनी 10वीं की पढ़ाई पूरी की। पांच साल बाद उन्होंने झारसुगुड़ा के एक स्थानीय कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक किया।
प्रयास
6वें प्रयास में पास की परीक्षा
शशिकांत ने देश में सबसे कठिन प्रोफेशनल परीक्षाओं में से एक CA फाइनल परीक्षा को पास किया है।
यह CA फाइनल परीक्षा पास करने के लिए शशिकांत का 6वां प्रयास था। उन्होंने अपने 6वें प्रयास में इस परीक्षा को पास किया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल 20% से भी कम परीक्षार्थियों ने परीक्षा पास की है और उन परीक्षार्थियो में शशिकांत अपनी जगह बनाने में सफल रहे हैं।
बयान
डिक्शनरी से सुधारी इंग्लिश वोकेबलरी
HT के अनुसार शशिकांत ने कहा, "मेरे परिवार में और कोई इतना नहीं पढ़ा है। मैं अंग्रेजी में बहुत बेकार था और नियमित रूप से ट्यूशन नहीं ले सकता था। इसलिए मैंने इंग्लिश डिक्शनरी से पढ़कर धीरे-धीरे अपनी इंग्लिश वोकेबलरी में सुधार किया।"
पढ़ाई
18 से 19 घंटे पढ़ाई करते थे शशिकांत
परिवार की हालत देख शशिकांत ने ज्यादा अध्ययन करना शुरू किया और अपने भाई की ठेला लगान में मदद भी करते रहे।
शशिकांत अपने पहले पांच प्रयासों में असफल रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
शाम के समय वे अपने भाई के ठेले पर जाते थे, लेकिन उनके भाई उन्हें ज्यादा समय तक वहां रुकने नहीं देते थे।
शशिकांत की मां इंद्रा देवी शर्मा ने बताया कि उनका बेटा दिन में 18 से 19 घंटे पढ़ाई करता था।
कोचिंग
तैयारी के लिए मामा से लिया लोन
पैसे की कमी कारण शिशकांत की CA की परीक्षा की तैयारी अच्छे से नहीं पा रही थी।
शशिकांत का कहना है कि उन्होंने आईडिया लगाया, तो पाया कि वे केवल चार पेपरों के लिए कोचिंग ले सकते थे।
उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने अपने चार पेपर के लिए मामा से लोन लिया था और अन्य चार पेपर के लिए खुद से पढ़ाई की थी।
उन्हें CA की परीक्षा देने के लिए उनके शिक्षक ने कहा था।