CBSE ने 10वीं में पास होने के लिए 33 प्रतिशत वाले पुराने मानदंड को लागू किया
क्या है खबर?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं में पास होने के लिए कुल अंकों के मानदंड को बदल दिया है। द टेलीग्राफ के मुताबिक, केंद्रीय बोर्ड पिछले शैक्षणिक सत्र की तरह ही सभी विषयों में उत्तीर्ण होने के लिए कुल 33 प्रतिशत अंक अनिवार्य करने के नियम को जारी रखेगा। CBSE ने यह जानकारी 21 सितंबर को जारी एक अधिसूचना में दी है, जो शैक्षणिक सक्ष 2026-27 में लागू रहेगा।
बदलाव
CBSE ने क्या कहा?
CBSE ने अधिसूचना में कहा, "शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रश्न पत्र के प्रारूप और मूल्यांकन पद्धति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उत्तीर्ण होने के मानदंड वही रहेंगे जो शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान लागू थे।"
बता दें कि केंद्रीय बोर्ड ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है, जब उसे 10वीं की परीक्षा में उत्तीर्ण दर में गिरावट का डर था। हालांकि, उसने ऐसा आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है।
नियम
अप्रैल में लागू किया था पास होने का नया नियम
बोर्ड ने अप्रैल में पाठ्यक्रम और मूल्यांकन नीति में बदलावों का विस्तृत विवरण दिया था।
उसने घोषणा की थी कि 2026-27 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा में छात्रों को उत्तीर्ण होने के लिए प्रत्येक विषय में यानी बोर्ड परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन दोनों में अलग-अलग 33-33 प्रतिशत अंक लाने होंगे।
अब ये नियम वापस ले लिया गया है। अब छात्र पास होने के लिए बोर्ड परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन दोनों में मिलाकर 33 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सकते हैं।
फैसला
क्यों लिया फैसला वापस?
इस साल CBSE ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की थी, जिसको लेकर 12वीं के परिणामों में देरी हुई और परिणाम के बाद मूल्यांकन संबंधी समस्याओं पर काफी सवाल उठे थे।
इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने CBSE को इतनी जल्दी एक-साथ बहुत प्रयोग न करने की सलाह दी थी।
हालांकि, बताया जा रहा है कि बोर्ड ने सिर्फ इस वर्ष के लिए यह निर्णय टाल दिया है, लेकिन इसे 2027-28 में लागू किया जा सकता है।