कैसे शिक्षा के क्षेत्र में एडेप्टिव असेसमेंट रणनीतियों को आगे बढ़ा रहा AI?
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल एडेप्टिव असेसमेंट शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला रहा है। यह हर छात्र के लिए अलग-अलग तरह से टेस्ट तैयार करता है। ये नए सिस्टम मशीन लर्निंग और तुरंत मिलने वाले डाटा का इस्तेमाल करते हैं। इससे टेस्ट के सवालों की मुश्किल और उनका विषय दोनों को छात्र की जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है। आइये जानते हैं AI कैसे हर बच्चे के सीखने की राह को आसान बना रहे हैं।
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एडेप्टिव लर्निंग का विकास
एडेप्टिव असेसमेंट की शुरुआत अल्केस और ड्रीमबॉक्स जैसे पुराने स्मार्ट ट्यूटरिंग सिस्टम से हुई थी। ये प्लेटफॉर्म बेजियन नॉलेज मॉडल्स का इस्तेमाल करते थे। इनकी मदद से छात्रों को उनकी समझ के स्तर के हिसाब से सीखने की अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजारा जाता था। इनकी कामयाबी की वजह यह है कि ये छात्रों की दिक्कतों को पहचान लेते हैं। अगर, कहीं कोई बात समझ नहीं आई हो तो ये उसे तुरंत पकड़कर सिखाने के तरीके में बदलाव कर देते हैं।
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कैसे काम करता है एडेप्टिव असेसमेंट?
वर्तमान के एडेप्टिव टूल सिर्फ टेस्ट के नंबर ही नहीं देखते, बल्कि वे देखते हैं छात्र ने कितनी देर में जवाब दिया और वह कितना जुड़ा हुआ महसूस कर रहा था? इससे बच्चों के बारे में पूरी जानकारी मिलती है और पढ़ाई में पीछे छूटने से पहले से ही उन्हें मदद के सुझाव दिए जा सकते हैं। जिन स्कूलों ने प्रेडिक्टिव इंटरवेंशन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है, वहां बच्चों के फेल होने की दर में 20 फीसदी कम हुई है।
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AI से चलने वाले असेसमेंट का इस्तेमाल
AI ने एडेप्टिव असेसमेंट को और भी बढ़ा दिया है। अब यह मल्टी-मॉडल असेसमेंट के जरिए प्रेजेंटेशन, प्रोजेक्ट, कोडिंग और ग्रुप वर्क जैसी चीजों को एक जैसे मानकों पर परखता है। ऑटोमेटेड ग्रेडिंग प्लेटफॉर्म शिक्षकों का बहुत समय बचाते हैं। ये निबंधों और परीक्षाओं की पहली जांच करके हर सप्ताह 15 घंटे तक का समय बचा सकते हैं। इससे शिक्षकों को छात्रों को व्यक्तिगत तौर पर प्रतिक्रिया देने का ज्यादा मौका मिलता है।
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एडेप्टिव असेसमेंट के प्रमुख टूल
काहूत जैसे प्लेटफॉर्म AI की मदद से क्विज तैयार करते हैं। साथ ही वे यह भी बताते हैं कि छात्रों ने पढ़ाई को कितना समझा है। टीचबेटर डॉट AI जैसे पूरे सिस्टम एक ही जगह पर 20 से ज्यादा टूल देते हैं, जो ऑटोमेटेड ग्रेडिंग और एडेप्टिव टेस्टिंग के लिए हैं। इससे शिक्षकों का तैयारी में लगने वाला समय 70 फीसदी तक कम हो जाता है। एन्यूस्प्रिंग आपकी परफॉर्मेंस के हिसाब से तुरंत बदलता रहता है।