वसीयत लिखने के बाद भी कर सकते हैं बदलाव, जानिए कब और कैसे
क्या है खबर?
कई लोग वसीयत बनाकर उसे सुरक्षित रख देते हैं और मान लेते हैं कि अब इसे दोबारा देखने की जरूरत नहीं है। हालांकि, समय के साथ परिवार, संपत्ति और आर्थिक स्थिति बदल सकती है। शादी, बच्चे का जन्म, प्रॉपर्टी खरीदना या बेचना जैसी घटनाओं के बाद पुरानी वसीयत में बदलाव जरूरी हो सकता है। जुलाई, 2026 से लागू नियमों के मुताबिक, व्यक्ति अपनी जिंदगी में वसीयत को बदल या रद्द कर सकता है, अगर वह कानूनी रूप से सक्षम हो।
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छोटे बदलाव के लिए कोडिसिल
वसीयत में बदलाव करने के लिए आमतौर पर कोडिसिल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसके जरिए मौजूदा वसीयत के कुछ हिस्सों में बदलाव किया जाता है। उदाहरण के लिए, इसमें एग्जीक्यूटर या लाभार्थी बदला जा सकता है।
अगर बदलाव बहुत ज्यादा हों, तो नई वसीयत बनाना बेहतर माना जाता है। आम तौर पर नई वसीयत पहले बनाई गई वसीयत को रद्द कर सकती है और नया दस्तावेज प्रभावी हो सकता है।
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नई वसीयत में नियमों का रखें ध्यान
वसीयत में बदलाव करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
नई वसीयत बनाते समय पुराने दस्तावेज की सभी जरूरी शर्तों को ध्यान में रखना चाहिए। वसीयत पर व्यक्ति के हस्ताक्षर और जरूरी गवाहों की मौजूदगी आवश्यक हो सकती है।
पुराने दस्तावेजों को भी व्यवस्थित तरीके से रखना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह का भ्रम न हो। बिना सही प्रक्रिया के बार-बार किए गए बदलाव परिवार के बीच विवाद और गलतफहमी की वजह बन सकते हैं।
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नॉमिनी और संपत्ति की भी करें जांच
वसीयत अपडेट करते समय बैंक खातों, बीमा पॉलिसी और दूसरे निवेशों में दर्ज नॉमिनी की जानकारी भी जांचनी चाहिए।
यह देखना जरूरी है कि एग्जीक्यूटर को मूल वसीयत की जगह की जानकारी है या नहीं। नई प्रॉपर्टी या निवेश जोड़े गए हैं, तो उनका भी रिकॉर्ड देखना चाहिए।
शादी, तलाक, बच्चे के जन्म या संपत्ति में बड़े बदलाव के बाद वसीयत की समीक्षा करना समझदारी है, ताकि दस्तावेज मौजूदा परिस्थितियों के मुताबिक रहे।