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डिस्चार्ज के समय कैशलेस स्वास्थ्य बीमा क्लेम क्यों हो सकते हैं खारिज?
स्वास्थ्य बीमा कंपनियां डिस्चार्ज के बाद क्लेम को अंतिम मंजूरी देती है

डिस्चार्ज के समय कैशलेस स्वास्थ्य बीमा क्लेम क्यों हो सकते हैं खारिज?

Jul 13, 2026
06:27 pm

क्या है खबर?

स्वास्थ्य बीमा का एक बड़ा फायदा कैशलेस इलाज की सुविधा है। जब कोई मरीज नेटवर्क अस्पतालों में से किसी एक में भर्ती होता है तो बीमाकर्ता इलाज के लिए कैशलेस क्लेम को मंजूरी दे सकता है। कई बार अस्पताल में भर्ती होने के समय मंजूर किए गए बीमा क्लेम को बाद में आंशिक या कभी-कभी पूरी तरह से खारिज कर दिया जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे क्या वजह हो सकती है।

समीक्षा 

डिस्चार्ज के बाद कंपनी करती है क्लेम की समीक्षा 

क्लेम की शुरुआती मंजूरी आम तौर पर शुरुआती जानकारी पर आधारित होती है। इलाज पूरा होने और फाइनल बिल जमा होने के बाद बीमा कंपनी ज्यादा विस्तार से समीक्षा करती है।

जब कोई अस्पताल कैशलेस ऑथराइजेशन प्रोसेस के लिए अप्लाई करता है, तो यह अनुरोध बीमा कंपनी से किया जाता है।

आम तौर पर इस अनुरोध में मरीज की केस हिस्ट्री, इलाज का प्रस्तावित प्लान, खर्च का अनुमान और पॉलिसी की जानकारी शामिल होती है।

अस्थायी स्वीकृति 

शुरुआत में मिलती है अस्थायी स्वीकृति 

इसके बाद बीमा कंपनी उपरोक्त जानकारी के आधार पर अस्थायी स्वीकृति प्रदान करती है। इसका यह अर्थ नहीं है कि दावा यहीं समाप्त हो जाता है।

बीमा कंपनी को रोगी की फाइल, चिकित्सक के नोट्स, जांच रिपोर्ट और अंतिम बिल जैसे अतिरिक्त साक्ष्यों की जांच करने का अधिकार सुरक्षित है।

कई पॉलिसीधारकों को गलतफहमी होती है कि पूर्व-अनुमोदन पूर्ण कवरेज की गारंटी देता है, लेकिन प्रक्रिया इस प्रकार काम नहीं करती है।

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डायग्नोसिस

डायग्नोसिस के बाद स्थिति में आ सकता है बदलाव 

कुछ मामलों में चिकित्सक मरीज को संभावित मेडिकल स्थिति के आधार पर भर्ती करते हैं। टेस्ट और इलाज पूरा होने के बाद, अंतिम बीमारी का पता भर्ती के समय बताई गई बीमारी से अलग हो सकता है।

अगर, अंतिम डायग्नोसिस पॉलिसी में शामिल न की गई स्थितियों, वेटिंग पीरियड या ऐसी स्थिति के दायरे में आता है, जो पॉलिसी में कवर नहीं है तो बीमा कंपनी भुगतान करने से मना कर सकती है, भले ही पहले मंजूरी दी हो।

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प्रकटीकरण 

जानकारी छुपाने पर आ सकती है दिक्कत

स्वास्थ्य बीमा अनुबंध पॉलिसीधारक द्वारा पूरी जानकारी देने पर आधारित होते हैं।

अगर, दावा आवेदन की जांच के दौरान यह पाया जाता है कि योजना खरीदते समय पिछली बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाया गया था तो दावे की प्रामाणिकता पर संदेह उत्पन्न हो सकता है।

शुरू में स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन अंतिम सत्यापन के दौरान ऐसी कोई भी छिपी हुई जानकारी सामने आने पर दावे कम या अस्वीकार किया जा सकता है।

खर्चे 

सीमा से ज्यादा खर्चे नहीं होंगे शामिल 

गैर-मेडिकल खर्च, इस्तेमाल होने वाली चीजें, प्रशासनिक खर्च, पर्सनल आराम और पॉलिसी की लिमिट से ज्यादा खर्च इसमें शामिल नहीं हो सकते हैं।

कमरे के किराए पर लिमिट और अलग-अलग इलाज के लिए कवरेज की सब-लिमिट भी लागू हो सकती हैं।

इससे ऐसी स्थिति बन सकती है कि पॉलिसी होल्डर को बिल का कुछ हिस्सा देना पड़े। क्लेम का आंकलन अस्पताल के दस्तावेजों के आधार पर होती है। इनमें कमी के कारण भी क्लेम में कटौती हो सकती है।

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