टाटा संस की लिस्टिंग का नोएल टाटा क्यों कर रहे हैं विरोध?
क्या है खबर?
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद टाटा संस के लिए मुश्किल में फंसी ग्रुप कंपनियों को आर्थिक मदद देना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। नोएल के मुताबिक, टाटा संस लंबे समय से संकट में चल रही कंपनियों के लिए वित्तीय सहारे की तरह काम करती रही है। उनका मानना है कि लिस्टिंग से ग्रुप का मौजूदा कामकाज बदल सकता है।
चिंता
अलग शेयरधारकों से मदद देना मुश्किल होने की चिंता
नोएल ने कहा कि लिस्टिंग के बाद कंपनी में अलग-अलग शेयरधारक होंगे, ऐसे में मुश्किल दौर से गुजर रही ग्रुप कंपनियों में निवेश को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
उन्होंने बताया कि अभी बैंक, कर्ज देने वाली संस्थाएं, शेयरधारक और सप्लायर इस बात को लेकर भरोसा रखते हैं कि टाटा संस जरूरत पड़ने पर ग्रुप की कंपनियों का साथ दे सकती है।
नोएल के मुताबिक, यह व्यवस्था करीब 150 साल से ग्रुप के कामकाज का हिस्सा रही है।
प्रस्ताव
टाटा ट्रस्ट्स ने विलय का प्रस्ताव रखा
टाटा संस की लिस्टिंग से बचने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को एक अलग प्रस्ताव रखा है।
इसके तहत टाटा संस का उसकी दो गैर-सूचीबद्ध सहायक कंपनियों टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के साथ विलय करने की बात कही गई है।
नोएल के अनुसार, इससे टाटा संस के संचालन और वित्तीय गतिविधियां एक ही कंपनी के ढांचे में आ जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा ढांचा देश की कई होल्डिंग कंपनियों में पहले से मौजूद है।
मांग
RBI से बातचीत की मांग
नोएल ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स चाहते हैं कि टाटा संस इस प्रस्ताव की समीक्षा करे और जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव करे।
उन्होंने RBI से भी इस मामले पर बातचीत करने की मांग की है। प्रस्ताव को लागू करने के लिए टाटा संस के बोर्ड और रिजर्व बैंक की मंजूरी जरूरी होगी।
नोएल ने यह भी कहा कि लिस्टिंग से टाटा संस के परोपकारी काम और ट्रस्ट से जुड़े उसके मौजूदा ढांचे पर असर पड़ सकता है।