टाटा संस पर शेयर बाजार में लिस्ट होने का दबाव क्यों बढ़ा?
क्या है खबर?
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होने को लेकर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने पब्लिक होने वाले नियम से छूट मांगी थी। टाटा संस लंबे समय से लिस्टिंग का विरोध करती रही है, क्योंकि इससे कंपनी पर ज्यादा निगरानी और ग्रुप के अंदरूनी लेन-देन की जानकारी देने की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।
NBFC
टाटा संस को NBFC माना गया
RBI के नियमों के तहत टाटा संस को अपर लेयर NBFC की श्रेणी में रखा गया है।
इसका मतलब है कि कंपनी का आकार और वित्तीय गतिविधियां ऐसी हैं, जिन पर ज्यादा निगरानी जरूरी मानी जाती है। इन नियमों के अनुसार, ऐसी कंपनियों को तय समय के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना पड़ता है।
टाटा संस ने इस दबाव से बचने के लिए अपना NBFC लाइसेंस सरेंडर करने और कर्ज चुकाने की कोशिश भी की थी।
नियम
नए नियमों से बचने की गुंजाइश कम
इस साल लागू किए गए नए नियमों ने टाटा संस के लिए लिस्टिंग से बचने की संभावना और कम कर दी है।
बदले हुए नियम केवल सीधे कर्ज देने या लेने वाली कंपनियों पर लागू नहीं होते, बल्कि ऐसी होल्डिंग कंपनियों पर भी लागू होते हैं, जो ग्रुप की उन कंपनियों में निवेश करती हैं।
टाटा संस का कर्ज कम हुआ है, लेकिन टाटा कैपिटल जैसी जुड़ी कंपनियां अब भी लोगों और संस्थानों से पैसा जुटा रही हैं।
लिस्टिंग
लिस्टिंग से शेयरधारकों की नजर बढ़ेगी
टाटा संस के शेयर बाजार में आने से कंपनी के कामकाज और वित्तीय प्रदर्शन की जानकारी ज्यादा सार्वजनिक हो सकती है।
इससे छोटे शेयरधारकों और निवेशकों की नजर टाटा ग्रुप के अलग-अलग कारोबार पर बढ़ेगी। IPO के बाद कंपनी के लिए पुराने और ज्यादा मुनाफे वाले कारोबार से नए या कम मुनाफे वाले प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।
इसलिए टाटा परिवार के लिए लिस्टिंग का विरोध करना मुश्किल हो सकता है।