होम लोन की EMI अचानक क्यों बढ़ जाती है? जानिए इसकी सबसे बड़ी वजह
क्या है खबर?
अगर आपने फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन लिया है, तो समय-समय पर आपकी EMI या लोन की अवधि बदल सकती है। कई लोगों को बैंक से ब्याज दर बदलने का संदेश मिलने के बाद समझ नहीं आता कि इसका उन पर क्या असर होगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ब्याज दर में बदलाव होने पर EMI, लोन की अवधि और कुल भुगतान की रकम भी बदल सकती है।
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ब्याज दर बदलने से पड़ता है असर
भारत में ज्यादातर फ्लोटिंग रेट होम लोन बैंक के तय बेंचमार्क ब्याज दर से जुड़े होते हैं। जब बैंक की उधारी महंगी होती है या बेंचमार्क दर बढ़ती है, तो होम लोन की ब्याज दर भी बदल सकती है। इसी वजह से आपकी मासिक EMI पहले जैसी नहीं रहती और हर महीने का बजट भी प्रभावित हो सकता है। वहीं, फिक्स्ड रेट होम लोन में तय अवधि तक ब्याज दर सामान्य तौर पर नहीं बदलती और किस्त स्थिर रहती है।
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EMI नहीं बढ़े तो बढ़ सकती है लोन की अवधि
हर बार ब्याज दर बढ़ने पर बैंक EMI नहीं बढ़ाते। कई बार मासिक किस्त पहले जितनी ही रखी जाती है, लेकिन लोन चुकाने की अवधि बढ़ा दी जाती है। इसका मतलब है कि आपको ज्यादा समय तक लोन चुकाना पड़ सकता है। इससे कुल ब्याज भी बढ़ जाता है और अंत में बैंक को पहले की तुलना में ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है, जिससे कुल खर्च काफी बढ़ सकता है।
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ऐसे कम कर सकते हैं बढ़ते ब्याज का असर
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि समय-समय पर अपना लोन स्टेटमेंट जरूर देखते रहें और ब्याज दर में बदलाव पर नजर रखें। अगर आपके पास बोनस या अतिरिक्त पैसा आए, तो उसका कुछ हिस्सा लोन की प्रीपेमेंट में लगा सकते हैं। इससे बकाया मूलधन कम होगा और बढ़ती ब्याज दर का असर भी घट सकता है। सही समय पर लिया गया छोटा फैसला भविष्य में बड़ी बचत करा सकता है और लोन जल्दी खत्म करने में मदद मिल सकती है।