प्राडा भारत में क्यों बनवाना चाहती है अपने लिए कोल्हापुरी सैंडल?
क्या है खबर?
इटली की लग्जरी फैशन कंपनी प्राडा पिछली बार हुई आलोचन से सबक लेकर इस बार लॉन्च किए जाने वाले कोल्हापुरी सैंडल का उत्पादन भारत में ही करेगी और स्थानीय कारीगरों के साथ काम करेगी। एक साल पहले मिलान फैशन शो में इसी तरह का डिजाइन पेश किया गया था, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। अब कंपनी महाराष्ट्र और कर्नाटक में 2 सरकारी संगठनों के सहयोग से भारतीय कारीगरों से ही सीमित संख्या में कोल्हापुरी सैंडल बनवाएगी।
विवाद
क्या था कोल्हापुरी सैंडल को लेकर विवाद?
प्राडा को विवाद का सामना तब करना पड़ा जब उसने मिलान फैशन शो में कोल्हापुरी सैंडल से मिलती-जुलती सैंडल प्रदर्शित कीं। इन डिजाइनों की भारतीय कारीगरों, विरासत समर्थकों और राजनीतिक नेताओं ने आलोचना की। साथ ही ब्रांड पर इन सैंडलों से उसकी सांस्कृतिक को अलग करने और शिल्प की उत्पत्ति का श्रेय न देने का आरोप लगाया। ये हाथ से बुने हुए चमड़े के जूते थे, जो पारंपरिक रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक में बनाए जाते हैं।
योजना
अब क्या है कंपनी की योजना?
विरोध का सामना करने के बाद प्राडा ने बाद में स्वीकार किया कि उसका डिजाइन प्राचीन भारतीय शैलियों से प्रेरित था। उसने टकराव के बजाय सहयोग के लिए भारत में कारीगर समूहों के साथ बातचीत शुरू की। अब वह कोल्हापुरी शैली से प्रेरित 2,000 जोड़ी सैंडल बनवाएगी। ये सैंडल दुनियाभर में लगभग 40 चुनिंदा प्राडा स्टोर और ऑनलाइन चैनल्स के माध्यम से बेचे जाएंगे और प्रत्येक जोड़ी की कीमत लगभग 881 डॉलर (लगभग 81,000 रुपये) होगी।