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मई में थोक महंगाई 9.68 प्रतिशत पर पहुंची, ईंधन और खाद्य वस्तुओं ने बढ़ाया दबाव
मई में थोक महंगाई बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंची

मई में थोक महंगाई 9.68 प्रतिशत पर पहुंची, ईंधन और खाद्य वस्तुओं ने बढ़ाया दबाव

Jun 15, 2026
03:47 pm

क्या है खबर?

भारत की थोक महंगाई दर मई में बढ़कर 9.68 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 8.30 प्रतिशत थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ईंधन और खाद्य वस्तुओं की महंगी कीमतों की वजह से हुई है। यह आंकड़ा विशेषज्ञों के 9.05 प्रतिशत के अनुमान से भी ज्यादा रहा। नई WPI सीरीज के तहत जारी यह पहला महंगाई आंकड़ा है, जिसमें आधार वर्ष 2022-23 रखा गया है।

ईंधन

ईंधन और ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाया दबाव

मई में थोक महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और बिजली क्षेत्र रहा है। इस श्रेणी में महंगाई अप्रैल के 24.89 प्रतिशत से बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई। वहीं कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 61.51 प्रतिशत तक पहुंच गई। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई। इसका असर भारत में परिवहन, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों की लागत पर भी देखने को मिला।

खाद्य

खाद्य वस्तुओं और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी

खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई मई में बढ़कर 4.49 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.11 प्रतिशत थी। वहीं प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई 4.99 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके साथ ही उद्योगों की उत्पादन लागत भी बढ़ी है। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई भी 6.68 प्रतिशत से बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गई। रसायन, धातु, मशीनरी और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में कीमतें बढ़ने से कंपनियों पर लागत का दबाव बना हुआ है।

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अर्थव्यवस्था

खुदरा महंगाई और अर्थव्यवस्था पर नजर

यह आंकड़ा ऐसे समय आया है जब मई में खुदरा महंगाई भी बढ़कर 3.93 प्रतिशत पहुंच चुकी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। अगर थोक स्तर पर लागत का दबाव बना रहा, तो इसका असर आगे चलकर खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है। सरकार ने नई WPI सीरीज में 957 वस्तुओं को शामिल किया है, जो पहले 697 थीं।

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