टाटा संस का मालिक कौन? जानिए कैसे होती है चेयरमैन की नियुक्ति
क्या है खबर?
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा पद नहीं संभालने का फैसला किया है। उनका कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म होगा। उनके फैसले के बाद टाटा संस के मालिकाना हक और चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर चर्चा बढ़ गई है। टाटा संस, टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है, इसलिए इसके चेयरमैन की भूमिका पूरे समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मालिक
टाटा संस का मालिक कौन है?
टाटा संस का मालिकाना हक किसी एक व्यक्ति के पास नहीं है।
कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स की है, जिसके पास करीब 66 प्रतिशत हिस्सा है। इनमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट प्रमुख हैं। वहीं, शापूरजी पलोनजी समूह के पास करीब 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
बाकी शेयर टाटा समूह की कंपनियों, टाटा परिवार के सदस्यों और अन्य निवेशकों के पास हैं। इसी वजह से टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका सबसे अहम रहती है।
चुनाव
टाटा संस का चेयरमैन कैसे चुना जाता है?
नए चेयरमैन के चयन के लिए टाटा संस का बोर्ड एक विशेष चयन समिति बनाता है।
यह समिति संभावित उम्मीदवारों की जांच करके किसी नाम की सिफारिश बोर्ड से करती है। इसके बाद बोर्ड उस उम्मीदवार की नियुक्ति पर औपचारिक फैसला करता है। यानी चेयरमैन चुनने में बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
हालांकि, प्रक्रिया यहीं खत्म नहीं होती और नियुक्ति को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी भी लेनी पड़ती है।
मंजूरी
टाटा ट्रस्ट्स की मंजूरी क्यों जरूरी है?
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण चेयरमैन की नियुक्ति में उनका समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि, चयन समिति और बोर्ड उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन अंतिम मंजूरी शेयरधारकों के स्तर पर होती है।
चंद्रशेखरन के मामले में भी टाटा ट्रस्ट्स ने उनके पांच साल के अगले कार्यकाल की सिफारिश की थी, लेकिन बोर्ड में सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।