कौन हैं अमन सेंगर, जिनकी AI कंपनी को 5,700 अरब रुपये में खरीद रही स्पेस-X?
क्या है खबर?
एलन मस्क की कंपनी स्पेस-X ने AI कोडिंग प्लेटफॉर्म कर्सर की मूल कंपनी एनीस्फीयर को 60 अरब डॉलर (लगभग 5,700 अरब रुपये) में खरीदने पर सहमति दे दी है। इस डील के बाद 25 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी अमन सेंगर अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। कर्सर के चार संस्थापकों में शामिल सेंगर को कम उम्र में बड़ी सफलता हासिल करने वाले टेक उद्यमियों में गिना जा रहा है। यह अधिग्रहण 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरा हो सकता है।
परिचय
कौन हैं अमन सेंगर?
अमन का पालन-पोषण अमेरिका के न्यूयॉर्क में हुआ, लेकिन उनके परिवार की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। उनके पिता अरविंद सेंगर IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र और हेज फंड प्रोफेशनल हैं, जबकि उनकी मां शिल्पा सेंगर एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट और उद्यमी हैं। अमन को बचपन से ही कंप्यूटर और तकनीक में गहरी रुचि थी। उन्होंने महज 14 साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था और तभी से AI में दिलचस्पी लेने लगे थे।
पढ़ाई
MIT की पढ़ाई ने बदल दी जिंदगी की दिशा
तकनीक के प्रति लगाव ने अमन को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) तक पहुंचाया और उन्होंने आगे की पढाई की। यहीं उनकी मुलाकात माइकल ट्रूएल, सुआलेह आसिफ और अरविद लुनेमार्क से हुई, जो बाद में उनके बिजनेस पार्टनर बने। अमन और माइकल ट्रूएल को नियो स्कॉलर्स प्रोग्राम के लिए भी चुना गया था, जो प्रतिभाशाली तकनीकी छात्रों को सिलिकॉन वैली के बड़े निवेशकों और उद्यमियों से जोड़ने का काम करता है।
करियर
गूगल से इंटर्नशिप और फिर शुरू किया अपना स्टार्टअप
कर्सर शुरू करने से पहले अमन सेंगर ने गूगल और हेज फंड कंपनी ब्रिजवाटर एसोसिएट्स में इंटर्नशिप की थी। उन्होंने अपनी AI कंसल्टेंसी कंपनी भी शुरू की। साल 2022 में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर कर्सर लॉन्च किया। शुरुआत में टीम ने दूसरे क्षेत्रों के लिए AI मॉडल बनाए, लेकिन बाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग पर ध्यान केंद्रित किया। इसके बाद उन्होंने ऐसा AI कोडिंग टूल बनाया, जो डेवलपर्स को कोड लिखने, समझने और सुधारने में मदद करता है।
इस्तेमाल
लाखों डेवलपर्स कर रहे इस्तेमाल
आज कर्सर का इस्तेमाल दुनियाभर में लाखों सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और करीब 50,000 टीमें कर रही हैं। एनवीडिया, एडोब, उबर, शॉपिफाई और पेपाल जैसी बड़ी कंपनियों के कर्मचारी भी इसका उपयोग करते हैं। उसके टूल्स का इस्तेमाल फॉर्च्यून 500 की 64 प्रतिशत कंपनियां करती हैं। कुछ ही वर्षों में कर्सर की वैल्यू अरबों डॉलर तक पहुंच गई और अमन सेंगर का टीनएज कोडर से सफल टेक उद्यमी बनने का सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।