हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सिर्फ प्रीमियम न देखें, इन शर्तों को जरूर पढ़ें
क्या है खबर?
आज के समय में बढ़ते इलाज के खर्च के बीच हेल्थ इंश्योरेंस परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा देता है। हालांकि, सिर्फ पॉलिसी खरीद लेना पर्याप्त नहीं है। कई बार पॉलिसी की कुछ शर्तों और सीमाओं की जानकारी नहीं होने पर अस्पताल में भर्ती होने के दौरान जेब से बड़ा खर्च करना पड़ सकता है। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले उसके कवरेज, नियम और बाहर रखे गए खर्चों को समझना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर परेशानी न हो।
#1
कैशलेस का मतलब पूरा खर्च कवर नहीं
कैशलेस सुविधा का मतलब यह नहीं है कि अस्पताल का हर खर्च बीमा कंपनी देगी।
ग्लव्स, कुछ मेडिकल सामान और अन्य खर्च पॉलिसी से बाहर हो सकते हैं। कुछ मामलों में बीमा कंपनी इलाज के सामान्य शुल्क के आधार पर भुगतान की सीमा भी तय कर सकती है। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय एक्सक्लूजन और ऐसी सीमाओं को ध्यान से पढ़ें।
अगर उपलब्ध हो, तो जरूरी अतिरिक्त कवर लेने पर भी विचार किया जा सकता है।
#2
रूम रेंट और बीमारी की जानकारी छिपाने से बचें
पॉलिसी में कमरे के किराये की सीमा होने पर ज्यादा महंगा कमरा चुनना पूरे अस्पताल खर्च को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे में कई दूसरे खर्चों का भुगतान भी कम हो सकता है। साथ ही पहले से मौजूद बीमारी या मेडिकल स्थिति छिपाना भी भारी पड़ सकता है। जानकारी छिपाने पर बीमा कंपनी भविष्य में दावा खारिज कर सकती है।
इसलिए पॉलिसी लेते समय अपनी मेडिकल हिस्ट्री सही-सही बताएं और कमरे की सीमा वाली शर्त को पहले समझें।
#3
सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी न लें
हेल्थ इंश्योरेंस चुनते समय केवल सबसे कम प्रीमियम वाली पॉलिसी लेना सही तरीका नहीं है।
सस्ती पॉलिसी में ज्यादा सीमाएं, कटौती या कम कवरेज हो सकता है, जिससे इलाज के समय अपनी जेब से खर्च बढ़ सकता है। एजेंट की मौखिक बातों पर भी निर्भर न रहें, बल्कि पॉलिसी दस्तावेज में लिखी शर्तें जांचें।
कवरेज, सीमाएं, बाहर रखे खर्च और दावा प्रक्रिया समझने के बाद ही पॉलिसी चुनना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।