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क्रेडिट कार्ड बिल में दिख रहा कोई संदिग्ध लेन-देन तो क्या करें?
क्रेडिट कार्ड से गलत लेन-देन होने पर इसकी सूचना तत्काल देना ठगी से बचा सकता है

क्रेडिट कार्ड बिल में दिख रहा कोई संदिग्ध लेन-देन तो क्या करें?

May 04, 2026
10:10 am

क्या है खबर?

कई बार आपको अपने क्रेडिट कार्ड के बिल में कई ऐसे लेन-देन दिखाई देते हैं, जिनके बारे में आपको पता भी नहीं होता है। डिजिटल भुगतान के साथ-साथ बढ़ते धोखाधड़ी के मामले को देखते हुए इस पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम आपको त्वरित कार्रवाई करने पर मजबूत सुरक्षा प्रदान करते हैं। आइये जानते हैं इस तरह के अनजान लेन-देन दिखने पर आपको क्या करना चाहिए।

पहला कदम 

संदिग्ध लेन-देन को मानकर चलें धोखाधड़ी 

जैसे ही आपको कोई संदिग्ध लेन-देन दिखे उसे धोखाधड़ी मानकर चलें, जब तक कि आपको उसके बारे में पूरा पता नहीं चल जाए। इसके लिए सबसे पहले बैंक की मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग या कस्टमर केयर नंबर के माध्यम से अपना कार्ड ब्लॉक करें। इससे आगे के किसी भी दुरुपयोग को रोका जा सकता है। इसके बाद, बैंक को फोन, ईमेल या ऐप के माध्यम से लेन-देन की रिपोर्ट करें, लेकिन हमेशा लिखित शिकायत अवश्य भेजें।

सूचना 

सूचना देने में न बरतें कोताही 

अगर, धोखाधड़ी बहुत बड़ी है तो इसकी सूचना सरकार के साइबर अपराध पोर्टल पर दें या वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके दें। जल्द से जल्द दी गई सूचना के आधार पर कार्रवाई करने से कई बार पैसों को गलत खाते में जाने से रोका जा सकता है। आप किसी अनधिकृत लेन-देन की रिपोर्ट 3 दिनों के भीतर करते हैं तो आमतौर पर आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं होती और आपको कोई नुकसान नहीं होगा।

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जांच 

सूचना मिलते ही बैंक शुरू करता है जांच 

सूचना मिलते ही बैंक जांच शुरू कर देता है। इसे चार्जबैक प्रक्रिया कहा जाता है। वे लेन-देन के पूरे रिकॉर्ड की जांच करते हैं। मर्चेंट से संपर्क करते हैं और यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि भुगतान वास्तव में अधिकृत था या नहीं। कई मामलों में बैंक कुछ ही दिनों में प्रारंभिक समीक्षा कर लेते हैं। कुछ संदिग्ध लगने पर जांच जारी रहने तक अस्थायी रूप से राशि आपके खाते में वापस जमा की जा सकती है।

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सावधानी 

बचने के लिए बरतें ये सावधानियां 

धोखेबाज फिशिंग लिंक, फेक ऐप्स या किसी के द्वारा आपके कार्ड की जानकारी हासिल कर लेते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी सावधानियां बड़ा फर्क ला सकती हैं। अपना OTP या CVV किसी के साथ साझा न करें, चाहे वे कितने भी भरोसेमंद क्यों न लगें। ऑनलाइन और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को तब तक बंद रखना भी फायदेमंद होता है, जब तक कि उनकी जरूरत न हो और मासिक बिल का इंतजार करने के बजाय नियमित रूप से स्टेटमेंट की जांच करते रहें।

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