लोन ऐप से मिनटों में मिल जाएगा पैसा, लेने से पहले पता कर लें ये बातें
क्या है खबर?
पैसों की जरूरत पड़ने पर कुछ ही मिनटों में लोन देने वाले ऐप आपको आकर्षित कर सकते हैं। ऐसे समय जब बैंक की मंजूरी प्रक्रिया में ज्यादा समय लग रहा हो या लोन देने में आनाकानी कर रहा हो। लोन लेते समय आपको केवल ऐप की तेजी के अलावा इसकी लागत समेत कई चीजें देखनी चाहिए। आइए जानते हैं लोन ऐप से पैसे लेते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
पब्लिक डायरेक्टरी
RBI की पब्लिक डायरेक्टरी से लगाएं पता
ऐप से लोन लेते समय यह भी देखें कि पैसे कौन दे रहा है, इसकी कुल लागत क्या होगी और फोन का कितना एक्सेस मांग रहा है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की एक पब्लिक डायरेक्टरी भी बनाई है, ताकि उधार लेने वाले यह पता लगा सकें कि कोई ऐप RBI-रेगुलेटेड बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) से जुड़ा है या नहीं।
यह डायरेक्टरी 1 जुलाई, 2025 से काम कर रही है।
लेंडर
लेंडर का लगाएं पता
कुछ ऐप्स बैंकों या NBFC के लिए लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (LSP) के तौर पर काम करते हैं। RBI के डिजिटल लेंडिंग नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी रेगुलेटेड लेंडर की होती है।
लोन लेने से पहले लोन देने वाले बैंक या NBFC का नाम पता करें।
अगर, कोई ऐप नहीं बताता कि लोन कौन दे रहा है, किसी पर्सनल अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने को कहता है या लोन से जुड़े दस्तावेज देने से मना करता है तो सावधान रहें।
ब्याज दर
ब्याज दर के अलावा भी देखें दूसरे शुल्क
कई ऐप कम ब्याज दर का विज्ञापन करती हैं, जबकि दूसरे शुल्क असल में लागत को बढ़ा देते हैं। 'की फैक्ट स्टेटमेंट' में सालाना ब्याज दर (APR) देखें।
डिजिटल लोन देने वाली रेगुलेटेड संस्थाओं को APR के जरिए कुल लागत बतानी होती है और लोन एग्रीमेंट होने से पहले 'की फैक्ट स्टेटमेंट' देना होता है।
इसमें बताए गए प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस या दूसरे चार्ज, देर से पेमेंट या पेनल्टी चार्ज और प्री-पेमेंट से जुड़ी किसी भी लागत की जांच करें।
फोन परमिशन
गैर-जरूरी एक्सेस देने से बचें
RBI के डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क के अनुसार, डिजिटल लेंडिंग ऐप्स द्वारा डाटा इकट्ठा करना जरूरत पर आधारित और पहले से ली गई मंजूरी पर आधारित होना चाहिए।
ऐप्स को कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग और फाइल्स या मीडिया जैसे रिसोर्स का एक्सेस नहीं लेना चाहिए।
KYC के लिए जरूरी होने पर साफ मंजूरी के साथ कैमरा, माइक्रोफान या लोकेशन का एक बार एक्सेस लिया जा सकता है। कोई लोन ऐप गैर-जरूरी रिसोर्स का एक्सेस मांगता तो सावधान हो जाना चाहिए।
KFS
मंजूरी से पहले KFS देखें
EMI दिखाने वाली प्रमोशनल स्क्रीन से ज्यादा काम की चीज 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) होती है।
लोन की रकम, समय-सीमा, ब्याज दर, APR, रीपेमेंट शेड्यूल, पेनल्टी चार्ज, रिकवरी का तरीका और कूलिंग-ऑफ पीरियड देखें।
RBI के नियमों के अनुसार, लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले ये जानकारी देना जरूरी है।
KFS, सैंक्शन लेटर और लोन एग्रीमेंट को सेव करके भी रखें, जिससे बाद में जमा हुई रकम, चार्ज या रीपेमेंट शेड्यूल का उससे मिलान किया जा सके।
जल्दबाजी
स्वीकार करने से पहले एक बार सोचें
कई बार लोग जल्दी लोन लेने के चक्कर में जल्दबाजी कर बैठते हैं, जिससे उन्हें बाद में पछताना पड़ता है।
अगर, ऐप आपको तुरंत मंजूरी देने के लिए दबाव डाल रहा है तो कुल रीपेमेंट का हिसाब लगाने के लिए कुछ मिनट लें और देखें कि क्या EMI आपकी मौजूदा देनदारियों के हिसाब से ठीक है।
इस डिजिटल लोन की जानकारी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को भी दी जाती है। इसमें चूक का आपके लोन रिकॉर्ड पर भी असर पड़ता है।