क्रेडिट रिपोर्ट में क्या होता है SMA और स्कोर पर कैसे डालता है असर?
क्या है खबर?
लोन की EMI और क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर चुकाना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इससे व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर अच्छा बना रहता है। बैंक क्रेडिट स्कोर तय करते समय सबसे ज्यादा ध्यान पेमेंट की आदत पर देते हैं। अगर कोई व्यक्ति समय पर EMI या कार्ड बिल नहीं देता, तो बैंक उसे लापरवाही मानता है। इसी स्थिति में अकाउंट को अलग कैटेगरी में डाल दिया जाता है, जिससे आगे चलकर लोन लेना मुश्किल हो सकता है।
SMA
क्या होता है SMA?
जब कोई व्यक्ति लोन या क्रेडिट कार्ड का पेमेंट समय पर नहीं करता, तो बैंक तुरंत उसे खराब लोन नहीं मानता। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार ऐसे अकाउंट को स्पेशल मेंशन अकाउंट (SMA) कहा जाता है। EMI 1 से 30 दिन लेट होने पर SMA-0, 31 से 60 दिन पर SMA-1 और 61 से 90 दिन पर SMA-2 माना जाता है। 90 दिन बाद अकाउंट NPA बन जाता है।
असर
SMA का क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
जब कोई अकाउंट SMA में जाता है, तो इसका असर सीधे क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है। आपका पेमेंट जितना ज्यादा देर रुकेगा, उतना ज्यादा ही आपका स्कोर भी गिरेगा। SMA-0 से SMA-2 और फिर NPA तक पहुंचने पर नुकसान बढ़ता जाता है। अगर एक से ज्यादा अकाउंट SMA में हों, तो बैंक इसे गंभीर वित्तीय परेशानी मानता है। NPA बनने पर स्कोर काफी नीचे चला जाता है और भरोसा टूट जाता है।
अन्य
SMA से कैसे बचें और क्या करें?
समय पर पेमेंट करना SMA से बचने का सबसे आसान तरीका है। EMI और क्रेडिट कार्ड बिल के लिए ऑटो-डेबिट सुविधा चालू रखें। हर महीने अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर देखें ताकि गलती जल्दी पकड़ी जा सके। अगर कोई बकाया दिखे तो तुरंत भुगतान करें। समय पर सुधार करने से अकाउंट NPA बनने से बच सकता है। थोड़ी सावधानी रखने से क्रेडिट स्कोर सुरक्षित रहता है और भविष्य में लोन मिलना आसान होता है।