ITR-U क्या है और क्यों है यह जरूरी?
क्या है खबर?
आज 31 मार्च है और टैक्स से जुड़ी गलतियों को ठीक करने का आखिरी मौका है। अगर आपने अपनी इनकम सही नहीं दिखाई या रिटर्न में कोई गलती रह गई है, तो अभी भी अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है। सरकार ने टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए यह सुविधा दी है, ताकि लोग बिना परेशानी अपनी फाइलिंग सुधार सकें और बाद में किसी तरह की दिक्कत से बच सकें।
वजह
ITR-U क्या है और क्यों जरूरी है?
ITR-U एक खास सुविधा है, जो इनकम टैक्स कानून के तहत दी गई है। इसके जरिए टैक्सपेयर्स अपनी पुरानी फाइलिंग में सुधार कर सकते हैं, छूटी हुई इनकम जोड़ सकते हैं या पहली बार रिटर्न जमा कर सकते हैं। यह विकल्प संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के बाद चार साल तक खुला रहता है। लेकिन जितनी जल्दी इसे भरा जाएगा, उतना कम अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा और प्रक्रिया भी आसान रहेगी।
फाइल
कौन कर सकता है फाइल और किन पर रोक?
कोई भी टैक्सपेयर चार साल के भीतर ITR-U फाइल कर सकता है, चाहे उसने पहले रिटर्न भरा हो या नहीं। अगर पहले फाइल किया है, तो उसकी जानकारी देना जरूरी होता है। हालांकि कुछ मामलों में इसकी अनुमति नहीं होती, जैसे निल या घाटे वाला रिटर्न, ज्यादा रिफंड मांगना या टैक्स कम करना। इसके साथ ही, अगर किसी पर जांच या कानूनी कार्रवाई चल रही है, तो वह भी यह विकल्प इस्तेमाल नहीं कर सकता है।
नुकसान
देरी करने पर बढ़ेगा अतिरिक्त टैक्स
ITR-U फाइल करते समय सामान्य टैक्स और ब्याज के साथ अतिरिक्त टैक्स भी देना पड़ता है। अगर 12 महीने के अंदर फाइल किया जाए तो 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगता है, जबकि देरी बढ़ने पर यह 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आखिरी तारीख तक इंतजार न करें। आज ही अपनी फाइलिंग जांचें और गलती हो तो तुरंत सुधार करें, ताकि ज्यादा पैसा और परेशानी दोनों से बचा जा सके।