इमरजेंसी फंड क्या है और यह क्यों है जरूरी?
क्या है खबर?
आज के समय में फाइनेंशियल प्लानिंग करते वक्त इमरजेंसी फंड रखना बेहद जरूरी माना जाता है। यह ऐसा पैसा होता है जो अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग रखा जाता है, जैसे मेडिकल बिल, नौकरी जाना या घर की मरम्मत। इस फंड की मदद से आपको कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे न केवल पैसे की सुरक्षा होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है और मुश्किल समय में आर्थिक सहारा मिलता है।
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कितना होना चाहिए इमरजेंसी फंड?
विशेषज्ञों के अनुसार, इमरजेंसी फंड इतना होना चाहिए कि वह कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों को कवर कर सके। अगर आपकी आय स्थिर नहीं है या आप फ्रीलांसर हैं, तो यह फंड 6 से 12 महीने तक का होना चाहिए। इसके लिए अपने सभी मासिक खर्चों को जोड़कर तय करना चाहिए। यह फंड आपको अचानक खर्च आने पर निवेश तोड़ने या कर्ज लेने से बचाता है।
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इमरजेंसी फंड कैसे बनाएं?
इमरजेंसी फंड एक बार में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बनाना चाहिए। शुरुआत छोटी रकम से करें और हर महीने नियमित रूप से बचत करें। इसे एक जरूरी खर्च की तरह मानें और इसमें लगातार पैसा जोड़ते रहें। बोनस, टैक्स रिफंड या अतिरिक्त आय को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। नियमित बचत से कुछ समय में एक मजबूत फंड तैयार हो जाता है, जो मुश्किल समय में काफी मददगार साबित होता है।
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फंड कहां रखें सुरक्षित?
इमरजेंसी फंड को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां से जरूरत पड़ने पर जल्दी निकाला जा सके और जोखिम भी कम हो। इसके लिए सेविंग अकाउंट, स्वीप-इन FD, लिक्विड फंड या ओवरनाइट फंड अच्छे विकल्प माने जाते हैं। इस पैसे को शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश में नहीं लगाना चाहिए। सही जगह पर रखा गया इमरजेंसी फंड आपको सुरक्षा और स्थिरता दोनों देता है, जिससे आपका फाइनेंस संतुलित बना रहता है।