ITR भरते समय ये गलतियां बन सकती हैं नोटिस की वजह
क्या है खबर?
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय कई लोग कुछ आम गलतियां कर देते हैं, जो बाद में परेशानी की वजह बन सकती हैं। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टैक्स कट जाने या आय पर छूट मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसे रिटर्न में दिखाने की जरूरत नहीं है। अगर रिटर्न और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो नोटिस या टैक्स में बदलाव जैसी स्थिति बन सकती है।
#1
TDS कटने के बाद भी आय जरूर दिखाएं
कई टैक्सपेयर्स मान लेते हैं कि जिस आय पर पहले ही TDS कट चुका है, उसे ITR में बताने की जरूरत नहीं होती।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सबसे आम गलतियों में से एक है। बैंक ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट और दूसरी ऐसी आय को रिटर्न में जरूर दिखाना चाहिए।
TDS केवल पहले से टैक्स काटने का तरीका है, लेकिन इससे आय बताने की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती और पूरी जानकारी देना हमेशा जरूरी रहता है।
#2
जरुर दें LTCG की जानकारी
कई लोग यह सोचकर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG की जानकारी नहीं देते कि यह तय सीमा तक टैक्स मुक्त है।
अगर किसी वित्त वर्ष में लाभ छूट की सीमा के भीतर भी है, तब भी उसकी जानकारी ITR में देना जरूरी है।
शेयर और म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग के रिकॉर्ड में पहले से मौजूद रहती है, इसलिए इसे छिपाना सही नहीं माना जाता और पूरी जानकारी सही तरीके से भरनी चाहिए।
#3
AIS, फॉर्म 26AS और TIS का जरूर करें मिलान
ITR जमा करने से पहले AIS, फॉर्म 26AS और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी में दर्ज सभी जानकारियों का अपने रिकॉर्ड से मिलान जरूर करें।
अगर किसी जानकारी में गलती दिखाई दे, तो उसे समय रहते ठीक करवाएं। वहीं अगर जानकारी सही है, तो उसे रिटर्न में जरूर शामिल करें।
इससे रिकॉर्ड में अंतर नहीं आएगा और भविष्य में नोटिस मिलने की संभावना भी काफी कम हो जाएगी तथा रिटर्न आसानी से स्वीकार होने की उम्मीद बढ़ेगी।