एन चंद्रशेखरन के जाने का असर, टाटा समूह के 120 अरब डॉलर के निवेश पर संकट
क्या है खबर?
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के दोबारा कार्यकाल नहीं लेने के फैसले से टाटा समूह की बड़ी योजनाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके जाने से अगले कुछ वर्षों में करीब 120 अरब डॉलर (लगभग 11,500 अरब रुपये) के निवेश से जुड़े प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। इनमें सेमीकंडक्टर, एयरलाइन, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, डिजिटल कारोबार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
तरीका
नोएल टाटा के नेतृत्व में बदलेगा निवेश का तरीका
चंद्रशेखरन के जाने के बाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की भूमिका बेहद अहम हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नोएल बड़े खर्च से पहले प्रोजेक्ट से मिलने वाले फायदे का सबूत चाहते हैं। उन्होंने कई महंगे प्रोजेक्ट्स की दोबारा समीक्षा पर जोर दिया है।
बोर्ड भी कुछ योजनाओं को धीमा करने या उनके खर्च पर दोबारा विचार करने के पक्ष में बताया जा रहा है। इससे टाटा ग्रुप में निवेश का तरीका बदल सकता है।
प्रोजेक्ट
सेमीकंडक्टर और बैटरी प्रोजेक्ट पर नजर
टाटा समूह के सेमीकंडक्टर कारोबार को सबसे अहम योजनाओं में माना जा रहा है।
गुजरात के धोलेरा में प्रस्तावित चिप फैब से भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है। हालांकि, तकनीक और संचालन से जुड़ी देरी ने परियोजना को चुनौती दी है।
बैटरी कारोबार में भी कंपनी खर्च को लेकर सावधानी बरत रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी कंपनियों से बढ़ती लागत प्रतिस्पर्धा के बीच बड़े पैमाने पर निवेश से पहले तकनीक को साबित करने पर जोर है।
चुनौती
एयर इंडिया और टाटा डिजिटल भी चुनौती
टाटा समूह के सामने एयर इंडिया को मजबूत करना और टाटा डिजिटल के लगातार नुकसान को कम करना भी बड़ी चुनौती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा डिजिटल के लिए अतिरिक्त फंडिंग मांग को बोर्ड ने मंजूरी नहीं दी और विस्तृत योजना मांगी। इसके बाद कंपनी में पुनर्गठन शुरू हुआ है। एयर इंडिया भी लगातार दबाव में है।
अब नए चेयरमैन के सामने ग्रुप की महत्वाकांक्षी योजनाओं और खर्च में अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।