रिलायंस को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 2.31 अरब डॉलर विवाद पर हाई कोर्ट करेगा फैसला
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने आज (7 अगस्त) रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके साझेदारों से जुड़े पन्ना-मुक्ता और ताप्ती ऑफशोर ऑयलफील्ड विवाद में दखल देने से इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार करीब 2.31 अरब डॉलर (लगभग 220 अरब रुपये) की वसूली से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को आगे बढ़ाना चाहती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की मेरिट के आधार पर आगे सुनवाई जारी रख सकता है।
मामला
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 1994 में केंद्र सरकार, रिलायंस, ब्रिटिश गैस और ONGC के बीच हुए प्रोडक्शन शेयरिंग समझौते से जुड़ा है।
केंद्र सरकार का आरोप है कि रिलायंस ने तय सीमा से ज्यादा खर्च दिखाकर अधिक राजस्व अपने पास रखा। दूसरी ओर रिलायंस का कहना है कि सरकार ने समझौते की गलत व्याख्या की है।
इसी विवाद को लेकर दोनों पक्ष लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और मामला अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
सुनवाई
हाई कोर्ट में जारी रहेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फरवरी के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है।
साथ ही रिलायंस की यह आपत्ति भी खुली रखी कि केंद्र सरकार की अपील सुनवाई योग्य है या नहीं। अदालत ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी अंतिम फैसले के बाद इस मुद्दे को दोबारा उठा सकती है।
अब हाई कोर्ट मामले के सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई करेगा तथा अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।
भविष्य
आगे क्या होगा?
केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में करीब 2.31 अरब डॉलर की वसूली के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था।
वर्ष 2023 में एकल न्यायाधीश ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद सरकार ने अपील दायर की है। अब हाई कोर्ट यह तय करेगा कि क्या अंतिम मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने से पहले आंशिक आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को लागू किया जा सकता है या नहीं।
इस फैसले पर दोनों पक्षों की आगे की रणनीति भी निर्भर करेगी।