शेयर बाजार में सेंसेक्स 3 दिन में 3,000 अंक उछला, क्या है तेजी की वजह?
क्या है खबर?
भारतीय शेयर बाजार में 3 दिनों से लगातार बढ़त का सिलसिला जारी है। 3 कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स अब तक 3,000 अंकों से अधिक चढ़ चुका है। 2 नवंबर को सेंसेक्स में 1,233 अंक और 3 नवंबर को 1,225 अंकों की तेजी आई थी। बुधवार सुबह भी इसमें करीब 400 अंकों की बढ़त देखी गई। वहीं, निफ्टी भी 23,800 के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। लगातार तेजी से निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
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विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मिला सहारा
बाजार में तेजी की सबसे वजह विदेशी निवेशकों की वापसी मानी जा रही है।
कई महीनों तक भारतीय शेयरों की बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक अब फिर से खरीदारी कर रहे हैं। 3 नवंबर को उन्होंने 6,836 करोड़ रुपये और 2 नवंबर को 3,114 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
इससे पहले 30 अक्टूबर को उन्होंने करीब 3,599 करोड़ रुपये का निवेश किया था। लगातार खरीदारी से बाजार में भरोसा बढ़ा है और बिकवाली का दबाव कम हुआ है।
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कंपनियों के अच्छे नतीजों से बढ़ा भरोसा
विदेशी निवेशकों की खरीदारी के साथ कंपनियों के बेहतर कारोबारी नतीजों ने भी बाजार को मजबूती दी है।
कई बड़ी कंपनियों के नतीजे उम्मीद से अच्छे रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसके अलावा, बड़ी कंपनियों के शेयरों की कीमतें पहले के मुकाबले आकर्षक होने से विदेशी निवेशकों को खरीदारी का मौका मिल रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और दुनिया के बाजारों में सुधार ने भी तेजी को सहारा दिया है।
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बड़े शेयरों में खरीदारी और टैक्स पर चर्चा का असर
विदेशी निवेशकों की वापसी से बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी है। इन शेयरों का सेंसेक्स और निफ्टी पर सीधा असर पड़ता है।
बाजार में लंबी अवधि के निवेश पर लगने वाले पूंजीगत लाभ कर को लेकर भी चर्चा जारी है। SEBI ने विदेशी निवेशकों के लिए इस कर को हटाने और घरेलू म्यूचुअल फंड की योजनाओं के बीच बदलाव पर छूट देने का सुझाव दिया है।
हालांकि, इन प्रस्तावों पर सरकार का फैसला आना अभी बाकी है।
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आगे भी तेजी बनी रहने के लिए खरीदारी जरूरी
बाजार में आई तेजी के बावजूद आगे की राह विदेशी निवेशकों की खरीदारी पर निर्भर करेगी।
हाल के दिनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ शेयर बेचे हैं, जबकि विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़ी कंपनियों के शेयरों में और निवेश आने से बाजार को सहारा मिल सकता है।
वहीं, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक ब्याज दरें और दुनिया के राजनीतिक हालात भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।