दिसंबर में सर्विस सेक्टर की रफ्तार हुई धीमी, 11 महीनों में निचले स्तर पर पहुंचा
क्या है खबर?
भारत के सर्विस सेक्टर में दिसंबर 2025 में सुस्ती देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में प्रदर्शन नवंबर के 59.8 से गिरकर 58.0 पर आ गया, जो 59.1 के शुरुआती अनुमान से कम है। यह आंकड़ा अभी भी विस्तार दिखाता है, लेकिन रफ्तार कमजोर होने का संकेत देता है। कमजोर मांग और सतर्क माहौल के बीच सर्विस सेक्टर की गतिविधियां पहले के मुकाबले धीमी और दबाव में रहीं।
विस्तार
11 महीनों में सबसे कम विस्तार
दिसंबर में भारत के सर्विस सेक्टर का विस्तार 11 महीनों में सबसे कम दर्ज किया गया। नए व्यवसाय की वृद्धि धीमी पड़ गई, जिससे कुल गतिविधियों पर असर पड़ा है। कंपनियों ने बताया कि ग्राहकों की दिलचस्पी बनी रही, लेकिन ऑर्डर की रफ्तार पहले जैसी नहीं रही। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सीमित खर्च की वजह से कई फर्मों ने नए प्रोजेक्ट्स टाल दिए, जिससे सेक्टर की कुल ग्रोथ पर साफ असर दिखा है।
गिरावट
रोजगार और भरोसे में आई गिरावट
नौकरी के मोर्चे पर भी दिसंबर में स्थिति कमजोर बनी रही। 42 महीनों से जारी हायरिंग का सिलसिला दिसंबर में आकर रुक गया। करीब 96 प्रतिशत कंपनियों ने अपने स्टाफ लेवल में कोई बदलाव नहीं किया, जबकि कुछ ने हल्की कटौती की है। इसके साथ ही, आने वाले समय को लेकर बिजनेस का भरोसा लगातार तीसरे महीने घटा और यह तीन साल से ज्यादा के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया।
राहत
अंतरराष्ट्रीय मांग से मिली कुछ राहत
इस बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार हुआ और नए एक्सपोर्ट ऑर्डर नवंबर के मुकाबले काफी तेज़ी से बढ़े थे। दिसंबर में इनपुट लागत में हल्की बढ़ोतरी हुई, लेकिन यह लंबे समय के औसत से नीचे रही। आउटपुट कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई और बहुत कम कंपनियों ने फीस बढ़ाई, जिससे आने वाले महीनों में कुछ स्थिरता की उम्मीद बनी हुई है।