सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, निवेशकों को 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान; क्यों गिरा बाजार?
क्या है खबर?
भारतीय शेयर बाजार में आज (1 अक्टूबर) भारी गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। आज दोपहर 2:00 के करीब सेंसेक्स 1,008 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 71,471 पर कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी 50 की बात करें तो यह 339 अंक टूटकर 22,280 पर था। बाजार में ऑटो, मेटल, बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखने को मिल रहा है।
नुकसान
निवेशकों की संपत्ति में 9 लाख करोड़ रुपये की कमी
शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है।
सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार बिकवाली के कारण कई बड़ी कंपनियों के शेयर नीचे आ गए, जिससे पूरे बाजार के कुल मूल्य पर असर पड़ा। बाजार में गिरावट के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर दबाव ने भी चिंता बढ़ाई।
इसके अलावा, प्रमुख स्तर टूटने से निवेशकों में और बिकवाली देखने को मिली है।
वैश्विक तनाव
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
बाजार में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है।
अल जजीरा के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए हमले का संकेत दिया है। इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका है। बाजार विशेषज्ञ अविनाश गोक्षकर के अनुसार, युद्ध बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है।
बॉन्ड यील्ड
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी उछाल
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड निचले स्तर से वापस बढ़ी और 0.65 प्रतिशत की तेजी के साथ 5.674 प्रतिशत तक पहुंची। वहीं, 30 साल की बॉन्ड यील्ड में भी बदलाव देखा गया।
शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशक शेयरों से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगा सकते हैं, जिससे भारतीय बाजार प्रभावित होता है।
अन्य
कच्चा तेल महंगा होना भी बड़ी वजह
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, युद्ध बढ़ने की आशंका में कच्चे तेल की नई खरीदारी शुरू हुई, जिससे इसकी कीमत बढ़ी। महंगा तेल भारत के लिए चिंता का कारण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
इससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और मुनाफे पर दबाव आ सकता है। महंगाई बढ़ने की चिंता भी बाजार को प्रभावित करती है।