SEBI दूसरे सर्विलांस सिस्टम पर कर रहा काम, जानिए क्या है इसका मकसद
क्या है खबर?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) सूचीबद्ध कंपनियों में बुरे तत्वों की पहचान करने के लिए एक दूसरे सर्विलांस सिस्टम पर काम कर रहा है। इसका मकसद आखिरकार ऐसी कंपनियों को डीलिस्ट करना है। SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश वार्ष्णेय ने एक कार्यक्रम में कहा कि नियामक ऐसे छोटे आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) की पहचान करने पर भी काम कर रहा है, जो कैपिटल मार्केट के लिए सही नहीं हो सकते और खुदरा निवेशकों को नुकसान हो सकता है।
तैयारी
मौजूदा सिस्टम का भी बेहतर प्रदर्शन
कमोडिटी और पूंजी बाजार सहभागी संघ (CPAI) के कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "हमारे पास एक सर्विलांस सिस्टम है, जो लाइव डाटा के आधार पर हेरफेर करने वालों को पकड़ता है और SEBI इस काम में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।"
उन्होंने आगे बताया, "हमने अपने दूसरे सर्विलांस सिस्टम का ब्लूप्रिंट लगभग तैयार कर लिया है, जो कैपिटल मार्केट में लिस्टेड कंपनियों के बीच ऐसे गलत तत्वों की पहचान करेगा, ताकि उन्हें डीलिस्ट किया जा सके।"
निगरानी
छोटी और मध्यम कंपनियों पर रहेगी नजर
वार्ष्णेय ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों पर ध्यान देने के साथ-साथ कैपिटल बाजार में आने की कोशिश कर रही कंपनियों, खासकर छोटे IPO लाने वाली कंपनियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
वार्ष्णेय ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों की संख्या बढ़ाने की SEBI की कोशिशों के साथ-साथ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, खासकर छोटी और मध्यम कंपनियों (SMEs) के मामले में, इससे पहले कि वे कैपिटल मार्केट में कदम रखें।