रेड बुल कर सकेगी ड्रिंक के लेबल पर एनर्जी शब्द का इस्तेमाल, जानिए क्या है मामला
क्या है खबर?
दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें रेड बुल इंडिया को अपने ड्रिंक्स से 'एनर्जी' शब्द हटाने के लिए कहा गया था। न्यायाधीश अमित महाजन ने प्राकृतिक न्याय के आधार पर कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने FSSAI को रेड बुल इंडिया को नया कारण बताओ नोटिस जारी करने की इजाजत दी है, ताकि उसे अपना पक्ष ठीक से रखने का मौका मिल सके।
आदेश
FSSAI ने दिया था यह आदेश
यह विवाद FSSAI के 1 जुलाई को रेड बुल, स्टिंग, एड्रेनालाईन रश, कैम्पा गोल्ड बूस्ट, हेल एनर्जी और मॉन्स्टर 90 दिनों के भीतर अपने लेबल से 'एनर्जी' शब्द हटाने के आदेश से शुरू हुआ।
नियामक का तर्क था कि तय मानकों के न होने के कारण वह एनर्जी ड्रिंक को एक श्रेणी के तौर पर मान्यता नहीं देता है।
उसने यह चिंता भी जताई कि शरीर और दिमाग को ऊर्जा देने जैसे दावे ग्राहकों को गुमराह कर सकते हैं।
चुनौती
कंपनी ने आदेश को दी चुनौती
रेड बुल ने FSSAI के सहायक निदेशक के 30 जून के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कंपनी से कहा गया था कि वह अपने कैफीन वाले ड्रिंक्स के लिए एनर्जी ड्रिंक शब्द का इस्तेमाल बंद करे।
कंपनी का तर्क है कि यह आदेश बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का मौका दिए जारी किया गया था।
उसने इस कार्रवाई की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया है, जिसके कारण उसकी बात सुने बिना ही यह फैसला ले लिया।