डिजिटल धोखाधड़ी से नुकसान पर मिलेगा 25,000 रुपये का मुआवजा, RBI ने रखा प्रस्ताव
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल बैंकिंग लेनदेन में साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए नई योजना का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत RBI और अन्य बैंक 50,000 रुपये तक के नुकसान के लिए मुआवजे की लागत शेयर करेंगे। इस प्रस्ताव के अनुसार, ग्राहकों को उनके नुकसान का 85 फीसदी तक या अधिकतम 25,000 रुपये में से जो भी कम हो का मुआवजा दिया जाएगा। इसे 1 जुलाई से लागू किया जा सकता है।
प्रस्ताव
क्या है मुआवजे का प्रस्ताव?
मुआवजे की लागत RBI, ग्राहक का बैंक और उस बैंक के बीच साझा की जाएगी, जहां पैसा ट्रांसफर किया गया था। इसमें एक शर्त है कि ग्राहक अपने जीवनकाल में केवल एक बार ही मुआवजे का लाभ उठा सकते हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले महीने कहा था कि इस पहल का उद्देश्य शुरुआती चूक को माफ करना और यूजर्स को इसके बाद अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
गलती
इस गलती पर मिलेगा मुआवजा
केंद्रीय बैंक का यह प्रस्ताव भारत में देनदारी की संरचना में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। अक्सर बैंक ग्राहकों की OTP शेयर करने जैसी गलतियों के लिए भुगतान करने में आनाकानी करते रहे हैं। अब RBI भारत की डिजिटल प्रगति को रोकने से बचने के लिए इन गलतियों के लिए मुआवजा देने को तैयार है। इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में प्वाइंट-ऑफ-सेल ट्रांसफर, ATM लेनदेन, सीधे जमा या निकासी, फोन-टू-फोन ट्रांसफर, ऑनलाइन और कार्ड भुगतान शामिल हैं।
कवरेज
थर्ड पार्टी की गलती भी होगी कवर
यह मुआवजा योजना थर्ड पार्टी द्वारा किए गए उल्लंघनों के साथ-साथ ग्राहक की लापरवाही के कारण हुए नुकसान को भी कवर करेगी। यह उल्लंघन जब नुकसान बैंक की सेवाओं या ग्राहक की कार्रवाइयों के कारण नहीं होता, बल्कि सिस्टम में कहीं और किसी गड़बड़ी के कारण होता है। ग्राहक की लापरवाही में लेन-देन के लिए किसी के साथ पिन, पासवर्ड, OTP या अन्य जानकारी शैयर करना, धोखाधड़ी की रिपोर्ट न करना और दुर्भावनापूर्ण ऐप्स डाउनलोड करना शामिल हैं।