RBI ने चुनौतियों का सामना करने के लिए बैंकों को ज्यादा पूंजी रखने का नियम बनाया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नए नियम बनाने की तैयारी कर रहा है। इन नियमों के तहत बैंकों को अपने पास ज्यादा पूंजी रखनी होगी।
यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा, ताकि मुश्किल वक्त में बैंक आसानी से चुनौतियों का सामना कर सकें। देश के बड़े बैंकों, जिन्हें D-SIBs कहा जाता है, उनके लिए यह 'लेवरेज रेशियो' कम से कम 4 फीसदी होना जरूरी है। दूसरे बैंकों के लिए यह सीमा 3.5 फीसदी तय की गई है।
RBI का यह कदम भारतीय बैंकिंग सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने और उसे और मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
RBI ने नियमों पर मांगे सुझाव
RBI चाहता है कि बैंक अपनी एक्सपोजर की गणना करते समय ऑफ-बैलेंस-शीट आइटम और जोखिम भरे सौदों को भी इसमें शामिल करें।
इससे बैंकों के आंकड़े ज्यादा साफ-सुथरे और समझने में आसान होंगे और उनके साथ छेड़छाड़ करना भी मुश्किल हो जाएगा।
RBI ने इन ड्राफ्ट नियमों पर 28 अगस्त तक सुझाव मांगे हैं। इन्हें 1 अप्रैल, 2027 से लागू करने की योजना है। वैश्विक स्तर पर अहम माने जाने वाले बैंकों की भारतीय शाखाओं पर भी ये नियम लागू होंगे।
साथ ही, उन्हें अपने मूल देश के नियामक द्वारा तय किए गए अतिरिक्त बफर्स का पालन भी करना होगा। अगर, वे इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो लाभांश और बोनस जैसी सुविधाओं पर पाबंदी लगाई जा सकती है।