वैश्विक संकट के बीच RBI ने रेपो रेट में नहीं किया बदलाव, 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित
क्या है खबर?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बनी वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में इसे 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है। इससे पहले फरवरी में भी इसे नहीं बदला गया था। हालांकि, दिसंबर में हुई समिति की बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की कमी की थी और रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया था।
मुद्रास्फीति
महंगाई दर नियंत्रण में- गर्वनर
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC बैठक के बाद कहा कि बदलते मैक्रोइकॉनॉमिक, वित्तीय घटनाक्रमों और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत आकलन करने के बाद सर्वसम्मति से रेपो दर को अपरिवर्तित रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर मौसम संबंधी संभावित असर के कारण जोखिम बढ़ा है। उन्होंने बताया कि स्थायी जमा सुविधा दर 5 और सीमांत स्थायी सुविधा दर 5.5 प्रतिशत पर बनी है।
चेताया
RBI ने सावधान किया
गर्वनर ने वित्त वर्ष 2027 के लिए नए जोखिमों की आशंका जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान मुद्रास्फीति, व्यापार और समग्र आर्थिक गतिविधि पर असर डाल सकता है। उन्होंने वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। उन्होंने बताया कि स्थिर उपभोग, निवेश की बढ़ती मांग और मजबूत सेवा क्षेत्र की गतिविधि से भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन संभावित खतरा बना हुआ है।
रेपो रेट
रेपो रेट स्थिर होने से क्या मिलेगा फायदा?
रेपो रेट के स्थिर होने से लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इससे पहले की तिमाहियों में रेट कम हो चुके हैं। होम लोन, पर्सनल लोन और वाहन लोन लेने वाले लोगों को इस बात से राहत जरूर मिलेगी कि लोन दरें न तो बढ़ेंगी और न ही घटेंगी। रेपो रेट स्थिर होने या कम होने से बैंकों को RBI से कम ब्याज दर पर कर्ज मिलेगा तो वह ग्राहकों को भी कम दर पर कर्ज दे सकेंगे।