Loading...
RBI ने नहीं किया रेपो रेट में बदलाव, बढ़ी मुद्रास्फीति के बावजूद 5.25 प्रतिशत पर बरकरार
RBI ने नहीं किया रेपो रेट में बदलाव, बढ़ी मुद्रास्फीति के बावजूद 5.25 प्रतिशत पर बरकरार

RBI ने नहीं किया रेपो रेट में बदलाव, बढ़ी मुद्रास्फीति के बावजूद 5.25 प्रतिशत पर बरकरार

लेखन गजेंद्र
Aug 05, 2026
10:18 am

क्या है खबर?

वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती मुद्रास्फीति के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गर्वनर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इसे 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है। समिति ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख तटस्थ बनाए रखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य के नीतिगत निर्णय आंकड़ों पर आधारित रहेंगे।

बयान

चरम पर पहुंचेगी मुद्रास्फीति- गर्वनर

गर्वनर मल्होत्रा ने कहा कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति में और वृद्धि होने की संभावना है। खासकर खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण तीसरी तिमाही में यह चरम पर पहुंचेगा।

उन्होंने कहा कि कीमती धातुओं को छोड़कर कोर मुद्रास्फीति, जो कुछ समय से स्थिर है, वित्तीय वर्ष के अंत तक कोर मुद्रास्फीति के अनुरूप होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि विकास दर मजबूत रहेगी, फिर भी वित्तीय वर्ष में इसमें गिरावट आने की उम्मीद है।

GDP

वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत

मल्होत्रा ​​ने कहा कि इस वर्ष वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत है। यह हमारे पिछले अनुमानों से लगभग 10 आधार अंक अधिक है।

उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में 7 प्रतिशथ, दूसरी तिमाही में 6.4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत का अनुमान था। जोखिम लगभग समान रूप से विभाजित हैं।

उन्होंने कहा कि मानसून की कमी और अनियमितता के कारण कृषि की संभावनाएं धूमिल दिख रही हैं।

ADVERTISEMENT

महंगाई

मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत रहने का अनुमान

गर्वनर मल्होत्रा ने काह कि कि इस वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो हमारे पहले के अनुमानों से 10 आधार अंक कम है।

उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही में यह 4.7, तीसरी तिमाही में 5.9 और चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जोखिम संतुलित होने के साथ, पहली तिमाही के लिए मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि विदेशी भंडार भी पर्याप्त है।

ADVERTISEMENT

समिति

पिछली कई बैठकों में कोई बदलाव नहीं

RBI लगातार कई तिमाही बैठकों में रेपो रेट को लेकर कोई बदलाव नहीं कर रहा है।

इससे पहले फरवरी और अप्रैल में हुई MPC की बैठक में भी रेपो रेट को बढ़ाने और घटाने पर कोई फैसला नहीं रखा गया था और इसे अपरिवर्तित रखा था।

हालांकि, दिसंबर में हुई समिति की बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की कमी की थी और रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया था। तब से यही बरकरार है।

रेपो रेट

रेपो रेट स्थिर होने से क्या होगा फायदा?

रेपो रेट के स्थिर होने से लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इससे पहले की तिमाहियों में रेट कम हो चुके हैं।

होम लोन, पर्सनल लोन और वाहन लोन लेने वाले लोगों को इस बात से राहत जरूर मिलेगी कि लोन दरें न तो बढ़ेंगी और न ही घटेंगी।

रेपो रेट स्थिर होने या कम होने से बैंकों को RBI से कम ब्याज दर पर कर्ज मिलेगा तो वह ग्राहकों को भी कम दर पर कर्ज दे सकेंगे।

ADVERTISEMENT