राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप, कंपनी और प्रमोटर शेयर बाजार से बैन
क्या है खबर?
ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स मुश्किलों में घिर गई है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी के खातों में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की है। जांच में वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन और राजस्व आंकड़ों पर सवाल उठाए गए हैं। इसके बाद कंपनी और उसके प्रमोटरों को जांच पूरी होने तक शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
मामला
क्या है पूरा मामला और आरोप?
SEBI का आरोप है कि कंपनी ने अपनी विदेशी सहायक कंपनियों के जरिए राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। जांच में पाया गया कि कंपनी की 97 से 99 प्रतिशत आय विदेशी इकाइयों से दिखाई गई थी, लेकिन इन लेनदेन से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। SEBI के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व दावों को पर्याप्त दस्तावेजों से साबित नहीं किया जा सका।
नुकसान
शेयर में गिरावट से निवेशकों को नुकसान
SEBI की कार्रवाई के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत गिरकर 104.65 रुपये पर पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी, 2023 में शेयर 1,028.40 रुपये के उच्च स्तर पर था, लेकिन बाद में इसमें लगातार गिरावट आई। इस दौरान कंपनी के बाजार पूंजीकरण में करीब 27,999 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। SEBI का कहना है कि सार्वजनिक निवेशकों की संपत्ति में लगभग 12,725 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
LIC
LIC और छोटे निवेशक भी प्रभावित
मार्च, 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी में करीब 1.98 लाख शेयरधारक थे। इनमें LIC की 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी और खुदरा निवेशकों की 14.13 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल थी। मौजूदा शेयर मूल्य के आधार पर LIC और छोटे निवेशकों की हिस्सेदारी का कुल मूल्य करीब 770 करोड़ रुपये बैठता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में निवेशकों का भरोसा कमजोर हो जाता है और शेयर बेचने के लिए खरीदार मिलना भी मुश्किल हो सकता है।
अन्य
फंड ट्रांसफर और लेनदेन पर भी सवाल
SEBI ने कुछ अन्य लेनदेन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच में सामने आया कि कंपनी ने एक संस्था के साथ 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई, लेकिन संबंधित संस्था ने ऐसे किसी लेनदेन से इनकार किया। इसके अलावा, 339 करोड़ रुपये प्रमोटर के निजी खातों में भेजे जाने और कुल 926 करोड़ रुपये के फंड ट्रांसफर पर भी सवाल उठाए गए हैं।